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निर्भया गैंगरेप केस पर कब होगी सुनवाई, नहीं पता!

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राजधानी में दिन प्रति दिन रेप, गैंगरेप (विशेषकर बच्चियों से) की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। राजनीतिक पार्टियां घटना होने पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की बौछार कर देती हैं और कुछ प्रदर्शन कर अपनी भड़ास भी निकाल लेती हैं, लेकिन इन घटनाओं को जड़ से रोकने की दिशा में कोई प्रयासरत नहीं है।
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वसंत विहार गैंगरेप मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। देश को हिलाकर रखने वाले इस मामले की चर्चा विदेशों में भी हुई। बावजूद इसके इस ओर किसी का ध्यान नहीं है कि आखिर मामला अंतिम पड़ाव तक क्यों नहीं पहुंचा।

सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई कब होगी तय नहीं। 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना के बाद लोगों की भावनाओं को देख यौन शोषण के मामलों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हुआ व इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में प्रतिदिन चली।
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मामला नियमित सुनवाई के लिए छोड़ दिया गया है

ट्रायल कोर्ट ने दोषियों व उनके वकीलों के रवैये, 80 से ज्यादा गवाहों इत्यादि के बावजूद 13 सितंबर 2013 को फैसले का निपटारा कर दिया। दोषियों विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, मुकेश व पवन को फांसी की सजा मिली व पांचवें आरोपी राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी।

दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि की फाइल हाईकोर्ट में पहुंची। हाईकोर्ट ने तुरंत संज्ञान ले लिया व मात्र छह माह में ही अपील का निपटारा कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल रखा।

हाईकोर्ट ने अपना फैसला 13 मार्च 2014 को दिया। अब मामला सर्वोच्च न्यायालय में है। मार्च 14 से सुनवाई लंबित है। अदालत ने अपील स्वीकार कर मामले को नियमित सुनवाई के लिए छोड़ दिया।

पुलिस, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार सभी इसे भूल गए।

तय नियमों के तहत यदि सुनवाई नियमित हुई तो यह मामला पांच से सात वर्ष बाद सुनवाई के लिए आ सकता है। पुलिस, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार सभी इसे भूल गए।

यदि वे जल्द सुनवाई के लिए आवेदन लगाते तो संभवत: सर्वोच्च न्यायालय में अब तक मामले का निपटारा हो जाता, लेकिन किसी को इस मामले से संभवत: कोई लेना देना नहीं है।

जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में आरोपियों को जल्द फांसी हो जाती तो संभवत: अन्य आरोपियों को सबक मिलता लेकिन उनके मन में डर आखिर बैठे भी कैसे।
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महिला सुरक्षा के लिए न तो पैसा न ही समय

वंसत विहार गैंगरेप के बाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर दिल्ली पुलिस में 14 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती पर जोर दिया। अदालत का मानना है कि कानून-व्यवस्था और जांच प्रक्रिया अलग-अलग होनी चाहिए।

केंद्र ने भी 14 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती पर हामी भर दी, लेकिन अब यूटर्न ले लिया। हजारों-लाखों करोड़ो के घपले सामने आ रहे हैं बावजूद इसके केंद्र सरकार ने अब 14 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती के बाद प्रति वर्ष 483 करोड़ रुपये की राशि वहन करने से इनकार कर दिया।

केंद्र ने कहा कि इतनी अधिक राशि उसके पास नहीं है। हाईकोर्ट ने इसी प्रकार एफएसएल लैब की संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए कहा। दिल्ली सरकार तीन वर्ष में अभी तक पूरी तरह से लैब की संख्या भी नहीं बढ़ा पाई।

वहीं सीसीटीवी कैमरों की बात करे तो अभी तक एक भी कैमरा नहीं लगा। अदालत में हर बार दिल्ली पुलिस व आप सरकार एक दूसरे पर आरोप जरूर लगा देती हैं। आखिर कैमरे कब लगें और कब आम लोगों की सुरक्षा होगी, यह अभी तय नहीं है।
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