पीठ ने अधिकारियों से सवाल किया आखिर आपने किस नियम के तहत एक सीट के लिए 12 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया। इस पर अधिकारियों ने वर्ष 2004 के एक नियम का हवाला दिया। अधिकारियों के पक्ष से संतुष्ट पीठ ने कहा कि साक्षात्कार के लिए सीट से करीब तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाने की परंपरा है लेकिन आयोग इसमें कम या ज्यादा करने के लिए स्वतंत्र है। पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले के देखते हुए आयोग द्वारा लिया गया फैसला पूरी तरह से वैध है। आयोग की ओर से वकील शिरीष कुमार मिश्रा जबकि यूपी सरकार की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन पेश हुए।
बीते 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को परीक्षा का रिजल्ट घोषित करने की इजाजत तो दे दी थी लेकिन नियुक्तियां करने पर रोक लगा दी थी। बुधवार को पीठ ने आयोग को नियुक्ति के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है और राज्य सरकार को जल्द सभी को नियुक्त करने का आदेश दिया है।