विधान सभा चुनाव में मतदान के रुझान को देखें तो आने वाले दिन दिल्ली में भाजपा के लिए अच्छे नहीं होंगे। अगर भाजपा दिल्ली में भारी अंतर से चुनाव हारती है तो इसमें राजधानी के वकीलों की नाराजगी भी एक अहम कारण होगा। राजधानी के वकील शुरुआत से ही मुख्यमंत्री पद पर किरण बेदी की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे थे।
गौरतलब है कि किरण को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद तीस हजारी कोर्ट में वर्ष 1988 में वकीलों पर लाठीचार्ज की घटना के खिलाफ एकजुट होकर वकीलों ने किरण बेदी के पुतले फूंकने शुरू कर दिए।
वकीलों ने तीस हजारी, कड़कड़डूमा अदालतों में पुतले फूंके थे। जिस दिन पूर्वी दिल्ली में प्रधानमंत्री की रैली थी उस दिन भी किरण बेदी का पुतला फूंका गया। राजधानी के करीब डेढ़ लाख वकीलों ने अपने मुव्वकिलों व जान-पहचान वाले लोगों से किरण बेदी का विरोध करने का आह्वान किया था।