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दिल्ली चुनाव फ्लैश बैकः 39 सीटें जीतकर कांग्रेस सबसे बड़े दल की रूप में उभरी थी

Fri, 17 Jan 2020 06:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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demo pic - फोटो : social media
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कोटला फिरोजशाह, कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, अजमेरी गेट, सीताराम बाजार तुर्कमान गेट, पुराना किला-विनय नगर और दरियागंज। आज के दौर में इन नामों को पढ़कर किसी के भी दिमाग में दिल्ली के पर्यटक स्थलों और बाजारों की तस्वीर उभरेगी। पर समय के पहिए को घुमाकर वर्ष 1951 में पहुंचे तो पता चलेगा कि ये सभी दिल्ली में विधानसभा क्षेत्रों के नाम थउल्लेखनीय है कि 27 मार्च 1952 को दिल्ली विधानसभा की 42 सीटों पर चुनाव हुआ था, जिनमें एक सदस्य वाले 36 और दो सदस्यों वाले 6 विधानसभा क्षेत्र थे। तब कोई आरक्षित सीट नहीं थी। दो सदस्यों वाले विधानसभा क्षेत्रों में रिंग रोड, सीताराम बाजार तुर्कमान गेट, पहाड़ी धीरज बस्ती जुलाहा, रैगरपुरा-देवनगर, नरेला और महरौली थे। जबकि बाकी 36 निर्वाचन क्षेत्र एक सदस्य वाले थे। 

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उस वक्त दिल्ली में कुल मतदाताओं की संख्या 7,44,668 थी, जिसमें एक सदस्यीय विधानसभा क्षेत्रों में 5,69161 और दो सदस्यीय विधानसभा क्षेत्रों में 1,75,507 मतदाता थे। एक सदस्यीय विधानसभा क्षेत्रों में 337412 तथा दो सदस्यीय विधानसभा क्षेत्रों में 184354 लोगों ने मतदान में भाग लिया था। इस तरह, कुल 5,21766 मतदाताओं ने मतदान किया था।

10 दलों के प्रत्याशी थे मैदान में
पहले चुनाव मे 10 राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। इनमें 39 सीटें प्राप्त करके भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। कांग्रेस को  2,71,812 मत (52.09 प्रतिशत) मिले थे। जबकि अखिल भारतीय जनसंघ 114207 मत (21.89 प्रतिशत) प्राप्त करके पांच सीटों के साथ दूसरे स्थान पर था। दो सीटें को साथ सोशलिस्ट पार्टी तीसरे स्थान पर रही, जिसे 12396 मत  हासिल हुए। एकमात्र सीट पर जीतने वाली अखिल भारतीय हिन्दू महासभा को 6891 मत (1.32 प्रतिशत) मिले। इन चुनावों में निर्दलीयों ने भी रिकॉर्ड 15.90 प्रतिशत मत प्राप्त किए। जबकि निर्दलीयों सहित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, फॉरवर्ड ब्लॉक (मार्क्सवादी), किसान मजदूर प्रजा पार्टी, अखिल भारतीय राम राज्य परिषद्, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और आल इंडिया शैड्युल्ड कॉस्ट फेडरेशन खाता नहीं खोल पाई थी।
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186 प्रत्याशी थे मैदान में
चुनावों में 406 लोगों ने नामांकन भरा था, जिसमें 34 उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए थे। जबकि 186 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए थे। इस तरह 186 प्रत्याशियों में मुकाबला हुआ था। उस समय महरौली विधानसभा क्षेत्र में अधिकतम 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।

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कांग्रेस से जीते प्रत्याशी

शांता वशिष्ठ (कोटला फिरोजशाह), कुशालेश्वर प्रसाद शंकर (पार्लियामेंट स्ट्रीट), दलजीत सिंह (सफदरजंग), शिवनंदन ऋषि (लोदी रोड), पुश्पा देवी (पुराना किला विनय नगर, राघवेन्द्र सिंह (दिल्ली छावनी), प्रफुल्ल रंजन चक्त्रस्वर्ती (रिंग रोड), करतार सिंह (चित्रगुप्त), मुश्ताक रॉय (मंटोला), शंकर लाल (रामनगर), भगवान दास (कश्मीरी गेट), युद्धवीर सिंह (चांदनी चौक), हरकिशन लाल (फाटक हब्श खान), आनन्द राज (मालीवाड़ा), सुल्तान यार खान (बल्लीमारान), नुरूद्दीन अहमद (चावड़ी बाजार), शफीक-उर-रहमान किदवई (अजमेरी गेट, शिवचरण दास (सीताराम बाजार तुर्कमान गेट), गुरमुख निहाल सिंह (दरियागंज), हुकूम सिंह (चंद्रावल), जगननाथ (रोशनआरा), मंगल दास (आर्यपुरा), गोपीनाथ (टोकरीवालान), हुकूम चन्द जैन-धनपत रॉय (पहाड़ी धीरज बस्ती जुलाहा), दयाराम-सुशीला नैयर (रैगरपुरा-देवनगर), जगप्रवेश चन्द्र (किशनगंज आनंद पर्वत), कृष्णा (सिविल लाइंस), फतेह सिंह (वजीराबाद), चिन्तामणि (शाहदरा), मांगेराम-प्रभुदयाल (नरेला), ब्रह्मप्रकाश (नांगलोेई), सूबेदार हठी सिंह (ईसापुर), अजीत सिंह (नजफगढ़) और मित्र सेन-सुखदेव महरौली सीट से जीते थे। 

अन्य सीटों पर जीते प्रत्याशी
भारतीय जनसंघ की ओर से अमीनचन्द (रिंग रोड), गिरधारी लाल सलवान (झंडेवालान), शाम चरण (डिप्टीगंज), दिलावर सिंह (नाईवाला), जंग बहादुर सिंह (किंग्सवे कैम्प), सोशलिस्ट पार्टी से मुश्ताक अहमद (कूचा चेला), बीडी जोशी (मानकपुरा) और अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के राम सिंह (तिब्बिया कॉलेज) सीट से जीते थे।
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