दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार बहुमत मिलने पर बहस छिड़ी हुई है। तीनों राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं और मतदाता भी अपने स्तर पर राजनीतिक दलों की जीत के कयास लगा रहे हैं।
मगर देखने वाली बात यह है कि मतदाता वर्ष 2013 के चुनाव का अनुसरण करेंगे या फिर वर्ष 1952 से लेकर 2008 तक विधानसभा और महानगर परिषद के नौ चुनाव की भांति किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत दिलाएंगे।
वर्ष 2013 विधानसभा चुनाव में पहली बार खंडित जनादेश आया। उस चुनाव परिणाम की छाया से मौजूदा चुनाव भी मुक्त नहीं है। मतदाताओं का रुख स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि तिकोना मुकाबला होने के कारण इस बार भी खंडित जनादेश की संभावना है।