गांव मोहम्मदपुर में संतोष की ढाणी स्थित झुग्गी में आग लगने की घटना कोई नयी नहीं है। परिवार का गुजारा करने के लिए यूपी से आया कृपाल का परिवार एक वर्ष पहले भी आग का दंश झेल चुका है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आग अचानक लगी या फिर लगाई गई।
उसकी झुग्गी में दो बार आग लगना अपने आप में सवाल खड़े कर रहा है? पिछले करीब चार साल से कृपाल और उसके साले बालेश का परिवार यहां रह रहा है। वह यहां मोहम्मदपुर निवासी सूरज भाटी की जमीन बटाई पर लेकर उसमें सब्जी उगाने का काम करते हैं।
शुक्रवार रात हुए हादसे में उनके परिवार के चार बच्चों की मौत हुई है। कृपाल व उसकी पत्नी व नवजात भी झुलसा है। साथ ही दोनों परिवारों की झुग्गी में रखा सारा सामान भी जलकर राख हो गया है।
पिछले साल छठ के समय भी लगी थी आग
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- फोटो : अमर उजाला
पीड़ित परिवार से बातचीत में यह बात सामने आई कि पिछले साल छठ के मौके पर भी दिन में सुबह करीब 9:00 बजे उनकी झोपड़ी में किसी ने आग लगा दी थी। तब गनीमत यह रही थी कि परिवार का कोई भी सदस्य झोपड़ी के अंदर नहीं था।
सभी लोग खेत में काम कर रहे थे। इस हादसे में भी उनका सारा सामान जलकर राख हो गया था। अभी वह फिर से अपनी जरूरत का सामान जुटा ही पाए थे, कि फिर से इस परिवार को किसी की नजर लग गई। लेकिन इस बार सामान ही नहीं, जानमाल की भी हानि उठानी पड़ी है।
मौसी की डिलीवरी से पहले आई थी कुसुम
gurugram fire in slum
- फोटो : अमर उजाला
दयाशंकर की बेटी कुसुम मौसी सूरजवती की डिलीवरी से पहले उनकी मदद के लिए यहां आई थी। लेकिन उसे क्या पता था कि मौसेरे भाई-बहनों के साथ उसकी भी जान चली जाएगी।
हादसे की सूचना मिलने पर उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश, एसडीएम सुशील सारवान, डीसीपी वेस्ट सुमित कुमार, एसीपी मानेसर धर्मबीर सिंह, रेडक्रास सचिव श्याम सुंदर, तहसीलदार विजय यादव ने मौका मुआयना किया।
प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों के लिए रात गुजारने को टेंट की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा घायलों को दिल्ली अस्पताल पहुंचाने और शवों को ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध करवाई है। वहीं, प्रशासन पीड़ित परिवार के घायलों को सहायता राशि उपलब्ध कराएगा।