23 सब-डिवीजनों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने 48 घंटे की हड़ताल बृहस्पतिवार से शुरू कर दी। पहले दिन 66 फीसदी कर्मचारी हड़ताल पर रहे।
इसके बावजूद हड़ताल का कोई खास असर दिखाई नहीं दिया। पुलिस के पहरे में बिजली दफ्तर खुले रहे। हालांकि, बिजली बिल काउंटर रोजाना की तरह खुले, लेकिन बिलों से संबंधित शिकायतों व अन्य समस्याओं का निपटारा नहीं हो पाया।
इसके चलते उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल से निपटने के लिए एस्मा लागू किया गया था, हड़ताली कर्मचारियों ने सरकार के इस कदम को गलत बताया।
अमर उजाला टीम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में हड़ताल का जायजा लिया। पेश है रिपोर्ट :-
पुलिस ने संभाला मोर्चा
बिजली कर्मचारियों की 22 मई को हुई हड़ताल के दौरान पूरे प्रदेश में हाल बेहाल हो गया था। ऐसे में 29 व 30 जून को हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसको ध्यान में रखकर पुलिस-प्रशासन अलर्ट नजर आया।
सरकार से वार्ता विफल होने पर मंगलवार रात 10 बजे से ही कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इससे पहले ही पुलिस ने सब-डिवीजनों, पावर हाउस और स्विच हाउस को अपने पहरे में ले लिया। किसी भी बिजली दफ्तर पर धरना-प्रदर्शन नहीं हुआ।
खुले रहे बिल कलेक्शन काउंटर
रोज की तरफ बुधवार को भी बिजली दफ्तरों के बिल कलेक्शन काउंटर खुले रहे। पल्ला, ओल्ड, एनआईटी सहित हर जगह बिल जमा कराने के लिए उपभोक्ताओं की भीड़ देखी गई।
हालांकि, बिल जमा करने के अलावा दफ्तरों में हड़ताल के चलते अन्य काम नहीं हो पाया। बिलों से संबंधित शिकायत लेकर दफ्तर पहुंचने वाले उपभोक्ताओं को वापस लौटाया जा रहा था। इसके अलावा कनेक्शन या फिर अन्य शिकायतें भी दर्ज नहीं हो सकीं।
442 कर्मी हड़ताल में नहीं हुए शामिल
फरीदाबाद सर्कल में स्थायी व अस्थायी कर्मचारियों की कुल संख्या 1345 बताई जाती है। इनमें से करीब 900 कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहे, जबकि 442 कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए।
सूत्रों की मानें तो सरकार हड़ताल के मद्देनजर ठेकेदारों को अपने पक्ष में करने में सफल रही। ठेकेदारों की तरफ से बिजली दफ्तरों पर पहले ही नोटिस चस्पा कर दिए गए कि अगर कोई भी अनुबंधित कर्मचारी दो दिवसीय हड़ताल में शामिल होता है तो उसकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।