हमेशा बिंदास रहने वाले पंजाब के युवक-युवतियों ने भी किसान आंदोलन में ‘त्याग’ की आहुति डाली है। पहले उन्होंने शादियां टाली और फिर अपने अभिभावकों की अनुपस्थित में खेती संभाली। फसलों की सिंचाई कर अब वह सिंघु बॉर्डर पर बिगुल फूंकेंगे। पंजाब से लड़के-लड़कियों के जत्थे चलने शुरू हो गए हैं। तल्ख तेवरों के साथ उन्होंने साफ कर दिया है कि नए कृषि कानून रद्द कराने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के बाद ही वह दम लेंगे।
सिंघु बॉर्डर पर पंजाब के किसान 11वें दिन भी डटे रहे। छह महीने की रसद लेकर दिल्ली पहुंचे किसानों का फोकस अब आठ दिसंबर को होने वाले भारत बंद पर है। इससे पहले उन्होंने बताया कि उनके बच्चे भी आंदोलन में शामिल होने लगे हैं। किसान करतार सिंह ने बताया कि उनकी बेटी रीतू की 4 जनवरी को शादी तय थी, लेकिन आंदोलन के कारण अब उसे आगे के लिए टाल दिया है। जब वह पंजाब से चले तो उन्होंने अपनी दोनों बेटियों रीतू और पप्पन को खेती की बागडोर सौंप दी थी, ताकि वह गेहूं आदि फसलों की सिंचाई कर सकें।
किसान सुरिंदर सिंह की बेटी नैना की शादी भी 7 दिसंबर से आगे खिसका दी गई है। उनका कहना है कि नैना भी अपनी सहेलियों के साथ मंगलवार तक सिंघु बॉर्डर पहुंच जाएगी। किसान हरभजन सिंह कहते हैं कि उनकी बेटी परविंदर और पुत्र रविंदर की शादी 16 दिसंबर को तय थी। आंदोलन के कारण शादियां अगले महीने के लिए टाल दी गई हैं। अस्तित्व की लड़ाई में उनके दोनों बच्चे फिलहाल खेती की देखभाल कर रहे हैं। जल्द ही वह भी अपनी टीमों के साथ प्रदर्शन में सहभागिता करेंगे।
वीडियो कॉल पर देखी बेटी
होशियारपुर के गुरप्रीत सिंह की पत्नी ने दो दिन पहले बेटी को जन्म दिया है। आंदोलन के कारण गुरप्रीत घर नहीं जा पाए तो उन्होंने वीडियो कॉल पर ही अपनी नन्ही परी को देखा। उनका कहना है कि उनकी पत्नी ने साफ कह दिया है कि मांग पूरी होने के बाद ही दिल्ली से वापस आना।
कंधे से कंधा मिलाकर देंगी साथ
भाकियू एकता (उगराहां) की महिला विंग की नेता हरिंदर कौर बिंदू के नेतृत्व में भी दर्जनों महिलाएं सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन कर रही हैं। उनके साथ 20 साल से 75 साल तक की महिलाएं आई हैं। उनका कहना है कि वह पुरुषों का कंधे से कंधा मिलाकर साथ देंगीं।