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नोटबंदी के बाद चाय से हुआ बारातियों का स्वागत, सादगीपूर्ण शादी कर पेश की मिसाल

Mon, 05 Dec 2016 01:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुुलंदशहर

सार

-करीब 300 घराती-बाराती शामिल हुए जहांगीराबाद के गांव जलीलपुर में सादगीपूर्ण शादी में अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर/जहांगीराबाद।
दूल्हे के पिता ने प्रधानमंत्री की पहल का समर्थन करते हुए की अनोखी पहल
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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न कोई बैंडबाजा और न ही कोई तामझाम। गांव में ही घर के बाहर लड़का-लड़की ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई। इसके बाद घर में ही पंडित ने दोनों के फेरे पढ़वाकर उन्हें जीवन साथी बना दिया। इस दरम्यान उपस्थित घरातियों और बारातियों को सिर्फ चाय पिलाई गई।
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ऐसी सादगीपूर्ण शादी हुई जहांगीराबाद के गांव जलीलपुर में, जिसकी पहल खुद दूल्हे के पिता ने की। नोटबंदी से उपजे कैश के संकट के बाद उन्होंने वधू के पिता से बात कर बेहद सादगीपूर्ण ढंग से शादी कराकर मिसाल पेश कर दी।

जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव जलीलपुर निवासी बिजेन्द्र सिंह ने अपने बेटे दिनेश की शादी जिला जेपीनगर के गांव गुरैठा खादर निवासी कालीचरण की बेटी बबीता के साथ तय की थी। जिस समय शादी तय की गई, उस समय नोटबंदी का फैसला नहीं हुआ था।
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प्रधानमंत्री की पहल का किया समर्थन

- फोटो : Getty Images
दोनों परिवार धूमधाम से शादी करते, लेकिन इसी दौरान सरकार ने नोटबंदी का फैसला ले लिया। लड़के के पिता बिजेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री के फैसले का समर्थन करते हुए सादगीपूर्ण तरीके से अपने बेटे की शादी करने का फैसला किया।

उन्होंने लड़की के पिता कालीचरण को पैसे की वजह से परेशान न होने के लिए फोन किया। उन्होंने कहा कि आप उनके गांव जलीलपुर में अपने परिजनों के साथ आएं और शादी सादगी से की जाएगी।

चार दिसंबर को लड़की पक्ष के लोग जलीलपुर आए। लड़का पक्ष की तरफ से भी रिश्तेदार और अन्य लोग गांव पहुंचे। गांव में बाराती और घराती का स्वागत सिर्फ चाय से किया गया। 

बैंक से नहीं निकाले पैसे

शादी में बैंक से ढाई लाख रुपये निकालने की छूट के बावजूद न तो लड़का पक्ष और न ही लड़की पक्ष की तरफ से बैंक से पैसे निकालने के लिए कोई पहल की गई। लड़के के पिता बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि वह प्रधानमंत्री की इस बात से पूरी तरह सहमत हैं।

हमें शादी विवाह सादगीपूर्ण तरीके से करने चाहिए। ग्रामीण द्वारा की गई पहल से मैं काफी प्रभावित हूं। अन्य लोगों को भी इस तरह की पहल के लिए आगे आना चाहिए। हमारा आज संवरेगा तो हमारा कल सुनहरा होगा। -आंजनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी

नोटबंदी के बाद पैसों की कमी हो गई है। प्रधानमंत्री ने अपील की थी कि सादगीपूर्ण तरीके से शादी की जाए। हम प्रधानमंत्री के साथ हैं और उनसे सहमत हैं। इसी कारण सादगीपूर्ण शादी की गई। -बिजेन्द्र सिंह, दूल्हे का पिता
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दोनों का परिवार है साधारण

हमारे पिताजी ने फैसला किया कि शादी विवाह सादगीपूर्ण तरीके से की जाए। हम अपने पिता के फैसले से पूरी तरह सहमत थे। शादी में फिजूलखर्ची रोकनी चाहिए। -दिनेश कुमार, दूल्हा

हर किसी की ख्वाहिश होती है कि उसकी शादी धूमधड़ाके से हो, लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा कि मेरी शादी सादगी के साथ हुई। कम से कम मेरे पिता को नोटबंदी के दौरान पैसों के लिए जूझना नहीं पड़ा। -बबीता, दुल्हन

मुझे बहुत चिंता थी कि नोटबंदी के दौरान वह अपनी बिटिया की शादी के लिए पैसों का इंतजाम कैसे कर सकेंगे। मेरे समधी का फोन आया कि शादी सादगी से की जाएगी। मुझे आज काफी गर्व है।-कालीचरण, दुल्हन का पिता

दूल्हे के पिता बिजेन्द्र सिंह और दुल्हन के पिता कालीचरण का परिवार साधारण है। दोनों साधारण किसान हैं। दूल्हा और दुल्हन भी उच्च शिक्षा नहीं पड़े हुए हैं। शादी कराने आए पंडित जी ने भी शादी की रस्म पूरी कराने के लिए कोई दक्षिणा नहीं ली।
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