हौजखास के 45 रेस्टोरेंट वहां आने वाले लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं। यह बेहद गंभीर मुद्दा है। यह लोगों के अधिकार का मामला है। हाईकोर्ट ने हौजखास गांव में आने वाले लोगों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर करते हुये यह टिप्पणी की है।
मुख्य कार्यवाहक न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ ने एमसीडी व याचिकाकर्ताओं को हौजखास गांव का मुआयना करने व वहां पर रास्तों की चौड़ाई की जानकारी देने का निर्देश दिया है। गांव में आने जाने के लिये केवल एक रास्ता होने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिये पांच सितंबर की तारीख तय की है।
खंडपीठ ने यह निर्देश याचिकाकर्ता पंकज शर्मा व अधिवक्ता अनुजा कपूर की दलीलें सुनने के बाद दिया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि हौजखास गांव में 120 रेस्टोरेंट व पब चल रहे हैं। इन्हें चलाने के लिये बिल्डिंग प्लान अनुमति तथा दमकल विभाग समेत दूसरे विभागें की एनओसी नहीं ली गई है। इसके बाद कोर्ट ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम को हौजखास गांव का साइट प्लान पेश करने का निर्देश दिया गया है जिसमें गलियों, इमारतों की लोकेशन व गांव का कुल क्षेत्रफल बताने के लिये कहा गया है।
एसडीएमसी ने कोर्ट को बताया कि उसने उन 19 रेस्टोरेंट मालिकों को काम बंद करने का नोटिस दिया है क्योंकि इन्होंने एजेंसियों से क्लीयरेंस नहीं ली थी।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि रोजाना यहां पर पांच हजार लोग आते हैं जबकि सप्ताह के अंत में यहां 15 हजार लोग आते हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि हौजखास में 45 रेस्टोरेंट में से 26 के पास ही वैध लाइसेंस है। इनमें से आठ ने लाइसेंस नवीनीकरण के लिये तथा चार ने नये लाइसेंस के लिये आवेदन किया है। पहले सात रेस्टोरेंट बिना लाइसेंस के ही चल रहे थे।