मिंटो रोड पुल के नीचे दो वर्ष पहले यानी 16 जुलाई 2018 को मूसलाधार बारिश होने के बाद हुए जलभराव में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बस डूब गई थी। उस समय भी प्रशासन पर सवाल खड़े हुए थे। जानकारों का कहना है कि मिंटो रोड रेलवे पुल के नीचे पानी की निकासी के लिए बना सीवरेज सिस्टम की ठप हो चुका है। यही वजह है कि हर मानसून में यहां जलभराव की स्थिति बन जाती है।
मिंटों पुल का निर्माण अंग्रेजों ने किया था। भारत के गवर्नर जनरल रहे लॉर्ड मिंटो के नाम पर पुल का नामकरण किया गया था। पुल के निर्माण के दौरान यहां पाइपलाइन डाली गई थी जिससे पानी की निकासी की जाती थी। हालांकि, बाद में डीडीयू मार्ग पर कुछ बड़ी इमारतें बनने के बाद इस पाइपलाइन को बंद कर दिया गया था। यही वजह है कि पानी निकलने के बजाय वापस आ जाता है और यहां बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बन जाती है।
पानी की निकासी के लिए जनरेटर पंप की है व्यवस्था
यहां पानी की निकासी के लिए पीडब्ल्यूडी की ओर से जनरेटर पंप की व्यवस्था है। जलभराव होने की स्थिति में यहां इसी पंप से पानी की निकासी की जाती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में खासा समय लग जाता है। इससे रास्ते से आने जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सीमा रेखा का भी फंसा है पेच
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) अनुसार मिंटो रोड पुल से कुछ कदमों की दूरी से पहले ही एनडीएमसी की सीमा रेखा खत्म हो जाती है। पुल का रखरखाव उत्तर रेलवे द्वारा किया जाता है और पुल के नीचे से गुजरने वाली सड़क पीडब्ल्यूडी के दायरे में आती है। यही कारण है कि अब तक इसके समाधान के लिए कोई रूपरेखा बनकर तैयार नहीं हो सकी है। वहीं रेलवे अधिकारियों के मुताबिक पुल के रखरखाव का काम उनके पास है जबकि पुल के नीचे का मामला सिविक एजेंसियों के दायरे में आता है।