जाटों के नहर को नुकसान पहुंचाने के कारण पहले से ही जल बोर्ड के चार संयंत्रों में पानी का उत्पादन बहुत ही कम हो रहा है और एक संयंत्र ठप पड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर शनिवार को यमुना नदी में अमोनिया की मात्रा बढ़ने से बोर्ड के दो संयंत्रों में पानी का उत्पादन बंद हो गया।
ऐसे में रविवार को करीब आधी दिल्ली को पानी का संकट झेलना पड़ेगा। यमुना नदी में एक बार फिर शनिवार को अमोनिया की मात्रा में अचानक वृद्धि हो गई।
इसका सीधा असर दिल्ली जल बोर्ड के वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधक संयंत्र में होने वाले पानी के उत्पादन पर पड़ा। इससे जल बोर्ड ने अपने दोनों संयंत्र बंद कर दिए।
दिल्ली के इन इलाकों में पेयजल संकट
उधर, दोनों संयंत्र बंद होने से उनसे जुड़े इलाकों में शाम को पेयजल आपूर्ति नहीं हुई। बोर्ड के अनुसार इन इलाकों में नई दिल्ली समेत इंद्रलोक, शास्त्री नगर, आजाद मार्केट, बाड़ा हिंदू राव, पहाड़ी धीरज, न्यू रोहतक रोड, देव नगर, मॉडल बस्ती, मोतिया खान, झंडेवालान, जामा मस्जिद, चांदनी चौक, दरिया गंज, एलएनजेपी अस्पताल, जीबी पंत अस्पताल, गुरुनानक अस्पताल, मिंटो रोड, सिविल लाइंस, मजनूं का टीला, अजमेरी गेट, सीता राम बाजार, बल्लीमारान, कूंचा पंडित, चावड़ी बाजार, नई सड़क, रामलीला ग्राउंड, मुकुंद पुर, बुराड़ी, आदर्श नगर, जहांगीर पुरी, मॉडल टाउन, कमला नगर, दिल्ली विश्वविद्यालय, जीटीबी नगर, मुखर्जी नगर, वजीराबाद, जगत पुर आदि इलाकों के समक्ष पेयजल संकट पैदा हो गया।
जल बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि यमुना नदी में अमोनिया की मात्रा समान्य होने के बाद ही दोनों संयंत्र चल पाएंगे। नदी में हरियाणा के विभिन्न शहरों से रासायनिक कचरा डाले जाने के चलते अमोनिया की मात्रा बढ़ी है। पिछले करीब दो माह में पांचवीं बार नदी में अमोनिया की मात्रा बढ़ने के कारण दिल्ली में पेयजल संकट पैदा हुआ है।
दूसरी ओर द्वारका जल शोधक संयंत्र के शनिवार को भी नहीं चलने के कारण उससे जुड़े इलाके के लोगों को पिछले आठ दिनों की भांति पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। इलाके के लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।