दिल्ली अब पानी के मामले में पूरी तरह से पड़ोसी राज्यों पर निर्भर नहीं है। दिल्ली जल बोर्ड ने पानी की कमी को दूर करने के लिए दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बोर्ड ने दो योजनाओं के तहत बीते पांच साल में करीब 140 एमजीडी पानी का उत्पादन बढ़ा दिया है। वह एक ओर अपने ज शोधक संयंत्रों में खराब पानी को साफ करके पीने योग्य बना रहा है। वहीं, दूसरी ओर यमुना किनारे विभिन्न स्थानों पर तालाब बनाकर भूजल का स्तर ऊपर उठाने का कार्य कर रहा है। इन स्थानों पर उसने ट्यूबवेल लगाए हैं। दिल्ली जल बोर्ड पांच साल पहले 863 एमजीडी पानी का उत्पादन करता था, लेकिन अब वह एक हजार एमजीडी पानी का उत्पादन करने लग गया है।
खास बात यह है कि इन पांच सालों में दिल्ली को पड़ोसी राज्यों से पानी की एक बूंद भी अतिरिक्त नहीं मिली है। इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड ने एक भी नया जल शोधक संयंंत्र नहीं बनाया है। वह पहले की तरह अब भी नौ संयंत्रों में पानी का उत्पादन कर रहा है और रैनीवेल व ट्यूबवेलों से पानी मुहैया कराता है। दिल्ली जल बोर्ड के नौ संयंत्रों में उनकी क्षमता की तुलना में 82 एमजीडी पानी का उत्पादन अधिक होना शुरू हो गया है। यह वह पानी है जो पहले साफ किए जाने वाले पानी में से निकलता है। इस पानी को पहले यमुना नदी व पश्चिमी यमुना नहर में बहा दिया जाता था। मगर अब इस पानी को साफ करके संबंधित संयंत्र से जुड़े इलाकों में आपूर्ति किया जाता है। इस पानी को साफ करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने अपने संयंत्रों में अलग संयंत्र स्थापित किए है।
55 एमजीडी अतिरिक्त पानी तालाबों से मिलना शुरू
दिल्ली सरकार की ओर से बाढ़ के पानी का भंडारण करने की योजना शुरू की गई। इस दिशा में पल्ला से वजीराबाद के बीच यमुना नदी के किनारों पर कई जगह तालाब बनाए गए है। इस तालाबों के कारण उन इलाकों का भूजल का स्तर ऊपर आ गया है और वहां पर ट्यूबवेल लगाए गए है। इन ट्यूबवेबलों से 55 एमजीडी अतिरिक्त पानी मिलना शुरू हो गया है।
पानी के उत्पादन का ब्योरा
संयंत - 2024 - 2019
हैदरपुर - 241 - 210
सोनिया विहार - 143 - 140
वजीराबाद - 134 - 123
भगीरथी - 112 - 100
चंद्रावल - 98 - 95
द्वारका - 52 - 40
नांगलाई - 44 - 40
ओखला - 21 - 20
बवाना - 20 - 15
रैनीवेल-ट्यूबेवल - 135 - 80
कुल - 1000 - 863