पानी ले लो...पानी...आरओ से ट्रीट किया हुआ पानी ले लो...सब्जी बेचने वाले की तरह जामिया नगर के अबुल फजल एंक्लेव की गलियों में ऐसी आवाजें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ चुकी हैं।
मो. तारिक के मुताबिक पहले पेयजल ओखला से लाना पड़ता था, लेकिन अब गलियों में रेहड़ी पर बिकता है। पानी के लिए मशक्कत तो खत्म हुई, लेकिन इस मद में खर्च जरूर बढ़ गया है। ऐसे में कई परिवार, अपने घरों में ही फिल्टर या आरओ का इस्तेमाल करते हैं जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। अब तक इलाके में घरों तक पाइपलाइन के जरिये पानी की आपूर्ति नहीं होती है।
अब्दुल वाहिद का कहना है कि पूरे इलाके में जिस पानी की आपूर्ति होती है, वह पीने लायक तो नहीं है। किसी और इस्तेमाल के लिए भी माकूल नहीं है। उन्होंने बताया कि चंद दिन पहले उनकी बेटियों को त्वचा संबंधी परेशानियां हुईं। वाहिद ने बताया कि पानी में टीडीएस की मात्रा मानकों से आठ से 10 गुना अधिक है। ऐसे में अगर उस पानी का इस्तेमाल किया जाए तो बीमारियों को दावत देना है।
मो. आरिफ ने बताया कि उनके घरों तक पानी की पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। अबुल फजल एंक्लेव में उनके कई रिश्तेदार रहते हैं, जहां पानी की वजह से बीमारी का खतरा हमेशा बना रहता है। उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी क्षेत्रवासियों को पाइपलाइन से पानी न मिलने की वजह से न केवल उन्हें रोजाना मुश्किलों से जूझना पड़ता है बल्कि इस पर खर्च कर भी बीमारियों की सौगात मिल रही है।
मोइन खान ने बताया कि आरओ के पानी को ट्रीट करने के बाद टीडीएस की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि अक्सर जोड़ों में दर्द की शिकायत होती हैं। पानी में टीडीएस की मात्रा कम होने से भी कई तरह की बीमारी होती है। इस तकलीफ से गुजरने के बाद मैं दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से आपूर्ति किए जाने वाले पानी को दूसरी जगह से मंगवाकर इस्तेमाल कर रहा हूं।