प्रवेश व निकास के लिए केवल एक ही दरवाजा उपलब्ध
इन कक्षाओं में प्रवेश और निकास के लिए सिर्फ एक ही दरवाजा है। यहीं नहीं, खिड़कियों में भी विज्ञापन के होर्डिंग लगे हुए हैं। वहीं, सत्यम ने बताया कि कि हर बैच में लगभग 2000 छात्रों को एक साथ पढ़ाया जाता है। ऐसी स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कई कोचिंग सेंटर में तो अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगे हुए है। ऐसे में आग लगती है तो ये बड़े हादसे को दावत दे सकती है। उन्होंने बताया कि मानवीय भूल शॉर्ट सर्किट को तो छोड़िए, अगर भूकंप आ गया तो हालात खराब हो सकते हैं।
मोटी फीस वसूलने के बावजूद, सुरक्षा इंतजाम नहीं
कई बिल्डिंग हैं, जहां बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। कई कोचिंग सेंटर छोटे-छोटे कमरे में चल रहे हैं। इतना ही नहीं बेसमेंट में कक्षाएं लगती हैं। मोटी फीस वसूलने के बावजूद सुरक्षा के नाम पर संचालक हाथ खड़े कर देते हैं। बत्रा कैंपस स्थित जैना हाउस, अंसल बिल्डिंग, मनुश्री बिल्डिंग में प्रवेश द्वार पर ही एक साथ दर्जनों तारें उलझी हुई हैं। इसी तरह बेसमेंट का भी यही हाल है, जहां हल्की सी बारिश होने पर जलभराव हो जाता है। ऐसे में बच्चों को करंट लगने की आशंका बनी रहती हैं।
जर्जर स्थिति में है बचाव वाले उपकरण
ज्यादातर कोचिंग सेंटर में आग से बचाव वाले उपकरण तो हैं, लेकिन स्थिति जर्जर है। संचालक का ध्यान सिर्फ बच्चों की संख्या पर रहता है। ऐसे में सूरत हादसे से सरकार व स्थानीय निकाय को सबक लेना चाहिए।
प्रचार बोर्ड से ढकी रहती है खिड़कियां
कोचिंग सेंटरों की खिड़कियां प्रचार बोर्ड से छिपी रहती हैं। एमसीडी से मिलीभगत की वजह से प्रचार बोर्ड बेतरतीब लगा दिए जाते हैं। सबसे बड़ी चुनौती कोचिंग संस्थान के प्रचार के लिए लगे बोर्ड को हटाना था। छात्र रजत नेगी का कहना है कि छात्रों की सुरक्ष कोचिंग संचालकों अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं। इन पर कड़ी कार्यवाई होनी चाहिए।