नई दिल्ली। तीस हजारी जिला अदालत ने एक फैसला सुनाते हुए सिविल लाइंस इलाके में स्थित करीब सौ साल पुराने शेर जंग कब्रिस्तान पर निजी मालिकाना हक के दावे को खारिज किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पूरी जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है, इसलिए किसी व्यक्ति का इस पर निजी स्वामित्व नहीं बन सकता। कल्लू मिस्त्री के बेटे नवाब ने करीब 82 बीघा जमीन पर अपना मालिकाना हक होने का दावा किया। उन्होंने अदालत में याचिका दायर की, लेकिन अपने दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज या सबूत नहीं पेश कर सके।
कब्रिस्तान के प्रबंधन वाली संस्था अंजुमन वकील कौम पंजाबियां ने कोर्ट को बताया कि कल्लू मिस्त्री को कई साल पहले सिर्फ कब्रिस्तान की देखभाल और चौकीदारी के लिए नियुक्त किया था। उनकी मौत के बाद उनका परिवार वहां रहने लगा और बाद में मालिक बनने की कोशिश करने लगा। साल 2018 में ही अदालत ने परिवार को जमीन खाली करने का आदेश दे दिया था। कोर्ट ने तब कहा था कि चौकीदार की नौकरी खत्म होने के साथ ही वहां रहने का कोई हक भी खत्म हो जाता है। नवाब की तरफ से दायर अपील को भी अब खारिज कर दिया गया।