केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं स्वच्छता मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार देश के बड़े गांवों में शौचालय व स्नानघर के पिट तथा रसोई से निकलने वाले पानी को शोधित करने के लिए 20 लाख रुपये देगी ताकि उस पानी को खेत में सिंचाई के प्रयोग लायक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण खुश न हों कि वे अपने बच्चाें को भैंस का दूध पिलाते हैं। क्या कभी सोचा है कि वह भैंसें उसी तालाब में पानी पीती और नहाती हैं जिसमें गांव का सारा गंदा पानी जाता है। इससे बीमारी फैलती हैं।
चौधरी बीरेंद्र सिंह सोमवार को यह बात गुड़गांव के काकरौला-भांगरौला गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता जागरूकता सप्ताह की शुरुआत करते समय कही। इस मौके पर केंद्रीय राज्यमंत्री रामकृपाल यादव एवं प्रदेश के लोक निर्माण एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद थे। इस दौरान तीनों ने स्वच्छता एवं पेयजल संरक्षण जागरूकता यात्रा को भी झंडी दिखाकर रवाना किया।
चौ. बीरेंद्र सिंह ने कहा कि 2019 में मनाई जाने वाली महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक देश की 90 प्रतिशत जनसंख्या को नल का शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने का लक्ष्य है। उन्होंने चिंता जाहिर की कि दुनिया में खुले आकाश के नीचे शौच जाने वालाें की सबसे बड़ी आबादी भारत की है।
उन्होंने कहा कि खासकर ग्रामीण क्षेत्रों को अपनी सोच बदलनी होगी। उन्हाेंने कहा कि देश में 17 करोड़ घर है जिनमें ग्रामीण अंचल के 8 करोड़ 80 लाख घराें में अभी भी शौचालय की सुविधा नहीं है। यहां उल्लेखनीय है कि राष्ट्रव्यापी जागरूकता सप्ताह का समापन 22 मार्च को नागालैंड के कोहिमा में होगा। इस मौके पर चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कांकरौला तथा भांगरौला में सामुदायिक केंद्राें का निर्माण करवाने के लिए अपने कोष से पांच लाख रुपये देने का ऐलान किया।