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गैस व एसीडिटी की दवा सेवन करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी

Mon, 02 Apr 2018 10:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अकसर गैस की शिकायत से परेशान लोग दवाइयों का सेवन करते हैं। एक वक्त बाद यह दवाइयां उनकी आदत बन जाती हैं। फिर इसके गंभीर नतीजे देखने को मिल सकते हैं। लोगों का लिवर भी खत्म हो सकता है। जिसके बाद प्रत्यारोपण के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता।

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यह कहना है बत्रा अस्पताल के गैस्ट्रो साइंसेज के डा. आर के हिमथानी का। एक कार्यक्रम के दौरान डा. हिमथानी ने बताया कि लंबे समय तक इस तरह की दवाइयां खाने से पेट में एसिड का लेवल कम हो जाता है।

जबकि कुछ बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए यह एसिड जरूरी है। दवाइयों से एसिड खत्म होने पर मुंह से पेट में जाने वाले संक्रमण खत्म नहीं हो पाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। जिसके चलते लिवर बीमार हो सकता है। 

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आखिरी स्टेज में होती है पहचान 

डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा मात्रा में अल्कोहल लेने और हेपेटाइटिस की वजह से ही लिवर खराब नहीं होता है। बल्कि वजन बढ़ने या गैस की ज्यादा दवाएं लेने से भी यही स्थिति रहती है। नॉन अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज 30-40 साल की उम्र में हो रही हैं। अकसर आखिरी स्टेज में इसकी पहचान हो पाती है। 
 
हड्डियों पर भी पड़ता है असर
बत्रा अस्पताल के ही डा. समीर ग्रोवर का कहना है कि लिवर के साथ इस तरह की दवाओं का असर हड्डियों पर भी पड़ता है। पेट में एसिड की मात्रा कम होने से विटामिन बी 12 कम होता जाता है। अन्य विटामिन भी कम हो जाते हैं। जिससे एनिमिया की संभावना बढ़ जाती है। हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के गैस का दवाइयां नहीं लेनी चाहिए। 
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