...तो दिल्ली से आगरा तक बन जाती दो लेन की सीसी रोड
मेट्रो के अधिकारियों की मानें तो 30 किलोमीटर के सिविल वर्क के दौरान यू-गर्डर, वायाडक्ट, 21 स्टेशनों का काम, 25 हेक्टेयर में फैला डिपो, 260 स्टाफ क्वार्टर आदि को बनाने में जितना मैटेरियल लगा हुआ है। इससे दिल्ली से आगरा तक दो लेन की सीसी रोड तैयार हो जाती। यही नहीं 30 किलोमीटर के दायरे में बिछाई गई ट्रैक और ऊपर लगे बिजली के तार के अलावा सब स्टेशनों से कनेक्ट की गई तारों को अगर एक साथ जोड़ दें तो यह दिल्ली से मेरठ तक 66 किलोमीटर के दायरे में चली जाएंगी।
दिल्ली-एनसीआर में दूसरे सबसे ऊंचे प्वाइंट पर होगी मेट्रो
ग्रेनो मेट्रो में एक स्थान पर मेट्रो 23 मीटर की ऊंचाई पर होगी, जो दिल्ली-एनसीआर में दूसरा सबसे ऊंचाई वाला प्वाइंट होगा। इससे पहले धौला कुंआ में मेट्रो 25 मीटर ऊंचाई तक गई है।
कंपनी परिसर तक बना है एफओबी
एनएसईजेड में जो लोग काम कर रहे हैं। उनको दादरी रोड स्टेशन आने के लिए पूरा दादरी रोड को पार करना होगा। लिहाजा वहां से एक एफओबी को कनेक्ट किया गया है जो कि एनएसईजेड के लोगों के लिए होगा, जिससे ऊपर ही ऊपर स्टेशन तक आ सकते हैं। इसी तरह से कई आवासीय सोसाइटियों और मॉल तक इसे कनेक्ट करने की योजना है।
इतना हुआ काम
ग्रेनो मेट्रो के सिविल का 99 प्रतिशत, इलेक्ट्रिकल का 92 प्रतिशत, सिग्नलिंग और टेलिकॉम का 80 प्रतिशत, ट्रैक का 100 प्रतिशत, रोलिंग स्टॉक 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ओवर ऑल ग्रेनो मेट्रो का 87 प्रतिशत भौतिक प्रगति हो चुकी है। वहीं वित्तीय प्रगति 73 प्रतिशत है। मेट्रो से लास्ट माइल कनेक्टिविटी की कोशिश की जा रही है। प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर का काम सभी 21 स्टेशनों पर पूरा हो चुका है।