राजनीतिक दल कर रहे गुणा-गणित
भाजपा : कार्यकर्ता से लेकर नेता तक कम मतदान को अपने पक्ष में सकारात्मक संकेत मान रहे है। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता प्रवीन शंकर कपूर का कहना है कि उनका कमिटेड वोटर हर परिस्थिति में मतदान करता है और यही उनकी मजबूती है। सवाल यह भी है कि क्या वाकई भाजपा समर्थक उतनी संख्या में निकले, जितना पार्टी अनुमान लगा रही है? मतदान केंद्रों पर देखी गई सुस्ती इस दावे को पूरी तरह पुष्ट नहीं करती है।
कांग्रेस : पूर्व मेयर फरहाद सूरी का कहना है कि सत्ता पक्ष से नाराजगी के कारण मतदान कम हुआ। दरअसल मतदाता सीधे तौर पर असंतोष जताने में संकोच करते हैं, लेकिन मतदान से दूरी बनाना एक साइलेंट प्रोटेस्ट की तरह होता है। हालांकि कांग्रेस के एक अन्य नेता चौ. चतर सिंह ने आत्मस्वीकृति भी जताई कि दलों ने इस बार आक्रामक प्रचार नहीं किया। पूर्व सांसद चौ. तारीफ सिंह का कहना है कि जनता जनप्रतिनिधियों से नाराज थी, इसलिए मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंची।
कम मतदान के मुख्य कारण
- उपचुनाव में रुचि कम रहना एक स्थायी पैटर्न है।
- दल प्रचार में ढीले रहे, चुनावी ऊर्जा सीमित रही।
- स्थानीय मुद्दों की तीव्रता उतनी
- गहरी नहीं दिखी, जितनी आम चुनाव में होती है।
- शहरी मतदाता पहले से ही चुनावों में कम हिस्सेदारी करता है और जब चुनाव छोटा हो तो मतदान और गिर जाता है।
- नाराजगी दोनों तरफ मौजूद थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि उसने किसे नुकसान पहुंचाया।
नगर निगम चुनाव में मतदान प्रतिशत
वर्ष प्रतिशत
1997 41 प्रतिशत
2002 52 प्रतिशत
2007 42 प्रतिशत
2012 55 प्रतिशत
2017 54 प्रतिशत
2022 51 प्रतिशत