इसमें पाया गया कि विटामिन डी की कमी से जूझ रहे पुरुषों की संख्या 79 फीसदी और महिलाओं की संख्या 75 फीसदी है। अधिकतर युवाओं में विटामिन डी की कमी है। 25 साल से कम आयु वर्ग वाले लोगों की संख्या 84 फीसदी है, जबकि 25-50 फीसदी आयु वर्ग के लोगों की संख्या 81 फीसदी है।
विटामिन डी समग्र विकास, मेटाबॉलिज्म, रोग प्रतिरोधक शक्ति और लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक होता है। शरीर में विटामिन डी की कमी से लोगों के प्रोस्टेट कैंसर, डिप्रेशन, डायबिटीज, रियूमेटॉयड आर्थराइटिस और रिकेट्स जैसी समस्या होने का खतरा रहता है।
इस बारे में डॉ. राजीव शर्मा ने बताया कि खानपान को लेकर लोगों की बदलती आदतों, घरों में रहने संबंधित जीवनशैली में बदलाव और सूरज की किरणों से कम होते एक्सपोजर के कारण विटामिन डी की कमी देखी जा रही है।