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विजयादशमी पर्व : दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में भव्य विश्व शांति महायज्ञ, 108 यज्ञ कुंडों में दी गई आहुतियां

Tue, 20 Oct 2026 11:52 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

विजयादशमी पर दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में भव्य ‘विश्व शांति महायज्ञ’ का आयोजन किया गया। जहां 30 स्वामियों और महंतों ने विश्व शांति के लिए वैदिक मंत्रों के साथ प्रार्थना की।
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अक्षरधाम मंदिर में ‘विश्व शांति महायज्ञ’ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विजयादशमी के पावन अवसर पर नई दिल्ली स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में भव्य ‘विश्व शांति महायज्ञ’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश के विभिन्न मंदिरों से आए 30 स्वामियों और महंतों ने विश्व शांति के लिए वैदिक मंत्रों के साथ प्रार्थना की। हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञ के यजमान के रूप में भाग लिया और शुभ संकल्प लिए।

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अक्षरधाम मंदिर में ‘विश्व शांति महायज्ञ’ - फोटो : अमर उजाला
इस विशेष पर्व के लिए अक्षरधाम परिसर को रंगोली, रंग-बिरंगी ध्वज-पताकाओं और तोरणों से सजाया गया था। महायज्ञ की शुरुआत सुबह छह बजे स्वामियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। वैदिक परंपरा के अनुसार, 108 यज्ञ कुंडों में पवित्र आहुतियां अर्पित की गईं। इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने भी भाग लिया।

अक्षरधाम मंदिर में ‘विश्व शांति महायज्ञ’ - फोटो : अमर उजाला
बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) के प्रमुख गुरुवर महंत स्वामी महाराज ने विश्व शांति महायज्ञ की शुरुआत की थी। इसके बाद से हर वर्ष दशहरे के अवसर पर अक्षरधाम परिसर में विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाता है।

अक्षरधाम मंदिर में ‘विश्व शांति महायज्ञ’ - फोटो : अमर उजाला
इस अवसर पर परम पूज्य महंत स्वामी महाराज का संदेश दोहराया गया। उन्होंने प्रार्थना की, “आज दुनिया में कहीं भी युद्ध, हिंसा और अशांति का जो माहौल है, वह जल्द समाप्त हो। सभी लोग प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ रहें। हर व्यक्ति के जीवन में आस्था, भक्ति और दृढ़ता का संचार हो। भगवान स्वामीनारायण के चरणों में हमारी यही प्रार्थना है।”
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अक्षरधाम मंदिर में ‘विश्व शांति महायज्ञ’ - फोटो : अमर उजाला
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माने जाने वाले इस पर्व पर श्रद्धालुओं ने केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति, एकता और भाईचारे के प्रसार के लिए भी प्रार्थना की। उपस्थित सभी लोगों ने अपने जीवन से नकारात्मकता, अहंकार और द्वेष को त्यागने तथा सकारात्मकता अपनाने का संकल्प भी लिया। 
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