बूढें किसानों पर आंसू गैस और लाठिया चलाकर दिल्ली पुलिस क्या साबित करना चाहती है...। मुजफ्फरनगर से आए 65 वर्षीय कुंवरपाल दिल्ली पुलिस को आढ़े हाथों लेते हुए कहा। किसानों का आरोप था कि पुलिस सीमा पार कर खूब लाठियां भांजी। पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई किसान आंसू गैस के धुंए से बेहोश हो गए।
किसानों का कहना था कि पुलिस को बल प्रयोग से पहले सोचना चाहिए था। वहीं पुलिस का कहना है कि राजधानी में कानून व्यवस्था बनाए रखने लिए ही सारी कार्रवाई की गई। सीमा में घुसकर लाठी भांजने की बात से पुलिस इंकार कर रही है।
मेरठ के दौराला से आए प्रकाश सिंह ने बताया कि किसान पिछले 9 दिनों से शांति पूर्वक यात्रा लेकर आ रहे थे। यूपी में इतने दिन यात्रा के दौरान किसी भी किसान ने शांति भंग नहीं की। दिल्ली पुलिस ने सरासर ज्यादती कर किसानों पर बल प्रयोग किया। उनके ट्रैक्टर की हवा निकालने के बाद उनमें नुकीली वस्तुएं घुसाकर उनके टायरों को बेकार कर दिया गया। इसके अलावा ट्रैक्टर की सभी वायरिंग भी पुलिस ने तोड़ दी।
बैरिकेडिंग के सामने खड़े ट्रैक्टरों में रखे किसानों के गैस सिलेंडर जिन्हें वह खाना बनाने के लिए अपने साथ लाए थे, पुलिसकर्मी उन्हें भी उठाकर ले गए। इससे किसानों में रोष है। पुलिस अधिकारी किसी भी सामान उठाने की बात से इंकार कर रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पुलिस कर्मियों को हिदायत दी गई थी कि यदि बल प्रयोग की जरूरत पड़े तो किसानों को बस खदेड़ा जाएगा, उनको चोट नहीं पहुंचाई जाए। किसानों का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई से दर्जनों किसानों को चोट लगी है।