हंसती-खेलती गलियों में बुधवार की सुबह 10 बजे खौफ का अजीब-सा मंजर था। हर तरफ सन्नाटा परसा था और गलियां पूरी तरह सूनी थीं। डरे-सहमे लोग घरों में बंद थे और खिड़कियों के सहारे बाहर का मंजर देख रहे थे।
इन हालात को देख मैंने करावल नगर के शिव विहार तिराहे पर लोगों को तलाशने का प्रयास किया, ताकि उनकी आपबीती जान सकूं। हर ओर सुरक्षा बलों को देखकर किसी ने भी बात करने की हिम्मत नहीं जुटाई।
जो लोग हिम्मत जुटाकर दर्द बयां करने पहुंचे भी, उन्हें पुलिस ने डांट-फटकार कर फिर घरों के अंदर भेज दिया। पत्रकार होने के नाते मैंने उनसे बात करने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने हालात खराब होने की बात कही।
मैं शिव विहार और चमन पार्क इलाके में हालात को समझने पहुंचा था। वहां हर तरफ राख के ढेर और सड़कों पर ईंट-पत्थर ही दिख रहे थे। शिव विहार तिराहे के पास उपद्रवियों का शिकार हुए राजधानी पब्लिक स्कूल में बच्चों की जली बेंच ही दिख रही थीं। स्कूल की बिल्डिंग जलकर धुआं के रंग में हो गई थी।
स्कूल के बाहर बैठे पुलिसवाले भी आपस में बात कर रहे थे कि उपद्रवियों की मासूम बच्चों के स्कूल से क्या दुश्मनी थी। शुक्र है कि घटना के वक्त स्कूल में बच्चे नहीं थे। यह मंजर देखने के बाद मैं मुस्तफाबाद की ओर बढ़ रहा था कि रास्ते में पुलिसवालों ने रोक लिया।
मेरे मीडिया से संबंधित होने की बात बताने पर पास में ही मौजूद केंद्रीय बलों के जवानों ने आगे जाने की इजाजत दे दी। हालांकि, सुरक्षा बलों ने ज्यादा अंदर गलियों की ओर न जाने की भी हिदायत दी।
इसके पीछे वजह उन्होंने जान को खतरे की बात कही। करीब पांच घंटे तक इलाके में लोगों से बात करने का प्रयास करने के बाद मैं वापस सुरक्षा बलों से घिरी वर्दियों के बीच से शाहदरा की सड़क की ओर निकल आया।