विक्रम जोशी की बहन के मुताबिक गत 16 जुलाई को माता कॉलोनी निवासी रवि ने फिर से उनकी बेटी से छेड़छाड़ की तथा अश्लील फब्तियां कसीं। इस बात को लेकर रवि से उनका विवाद भी हुआ। इसके बाद रवि ने छोटू उर्फ शहनूर व दो अन्य लड़कों को बुलाकर उनके बेटे पर हमला बोल दिया था। घटना को अंजाम देकर आरोपी फरार हो गए थे। विक्रम जोशी की बहन का कहना है कि घटना के संबंध में पुलिस चौकी में तहरीर दी लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इससे आरोपियों के हौसले बढ़ गए।
पैरवी के चौथे दिन मार दी गोली
भांजी के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना में कार्रवाई करने के लिए पत्रकार विक्रम जोशी पुलिस से पैरवी कर रहे थे। उन्होंने कई बार चौकी इंचार्ज राघवेंद्र और एसएचओ विजयनगर राजीव कुमार से भी बात की। पुलिस ने न तो कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन छेड़छाड़ के आरोपी और उसके दोस्तों ने चार दिन बाद सोमवार रात 10:30 बजे विक्रम को गोली मार दी।
हत्या के बाद दर्ज किया छेड़छाड़ का मामला
विक्रम जोशी को गोली मारने के बाद पुलिस नींद से जागी। अपनी करतूत से चौतरफा आलोचना की शिकार हुई पुलिस ने आनन-फानन में कार्रवाई शुरू कर दी। चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर घटना में शामिल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, तो वहीं 16 तारीख को हुई छेड़छाड़ और मारपीट की घटना भी दर्ज कर ली गई।
सोमवार को घटना से पहले हमलावरों ने विक्रम जोशी की रेकी की थी। रात करीब 8 बजे आरोपियों को अपने इर्द-गिर्द घूमता देख विक्रम जोशी को अनहोनी का अंदेशा हो गया था। उन्होंने चौकी इंचार्ज को फोन कर मदद भी मांगी, लेकिन कार्रवाई के बजाय चौकी इंचार्ज ने बीमारी का हवाला देते हुए मामले को सुबह दिखाने की बात कह दी। रात 10:30 बजे बहन के घर से निकलते ही हमलावरों ने विक्रम जोशी को गोली मार दी।
पुलिस को ठहराया जिम्मेदार
विक्रम जोशी की हत्या पर हर कोई पुलिस को कोस रहा है। परिवार के लोग हों या फिर मीडियाकर्मी, पुलिस की लापरवाही देखकर हर कोई हैरत में है। लोगों का कहना है कि पुलिस इतनी लापरवाह भी हो सकती है, इसका अंदाजा नहीं था। विक्रम की हत्या के लिए हर कोई पुलिस को जिम्मेदार बता रहा है। लोगों का कहना है कि छेड़छाड़ कि जो एफआईआर विक्रम को गोली लगने के बाद दर्ज की गई है, अगर वह पहले ही दर्ज हो जाती तो शायद विक्रम जोशी जिंदा होते।
एक बार फिर नाजायज हथियार से हुआ खून-खराबा
लॉकडाउन और उसके बाद गाजियाबाद में हत्या की कई वारदात हुईं। गौर करने वाली बात यह है कि जिस भी घटना में गोली मारी गई, उस घटना में अवैध हथियार का इस्तेमाल हुआ। इसी तरह विक्रम जोशी को भी 315 बोर के तमंचे से गोली मारी गई। मारपीट के दौरान मुख्य आरोपी रवि के दोस्त छोटू उर्फ शाहनूर ने सिर से सटाकर विक्रम को गोली मारी थी। पूछताछ में उसने बताया कि वह अपने दोस्त अभिषेक से तमंचा लेकर आया था। पुलिस ने अभिषेक को भी गिरफ्तार कर लिया, लेकिन अभिषेक के पास अवैध हथियार कहां से आया, इसका जवाब पुलिस के पास नहीं है।
धड़कन से बनी आस, 29 घंटे बाद शांत हो गया दिल
सिर में गोली लगने के कारण विक्रम जोशी की हालत शुरू से ही चिंताजनक बनी हुई थी। आईसीयू में शिफ्ट करने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। डॉक्टरों को उम्मीद थी कि विक्रम रिकवरी कर लेंगे तो ऑपरेशन कर दिया जाएगा। दिमाग स्थिर था, लेकिन धड़कन चल रही थी। यही धड़कन परिजनों को आस बंधा रही थी कि विक्रम फिर से उनके बीच सही सलामत लौटेंगे। मगर अफसोस 29 घंटे जिंदगी-मौत से जूझने के बाद बुधवार सुबह 4 बजे विक्रम के दिल ने धड़कना बंद कर दिया।
विक्रम जोशी के नौ हमलावरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। घटना में प्रयुक्त असलहा बरामद हो गया है। लापरवाही पर चौकी इंचार्ज के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। विभागीय जांच सीओ प्रथम कर रहे हैं। किसी अन्य की लापरवाही मिली तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। कलानिधि नैथानी, एसएसपी