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Delhi NCR News: 1930 हेल्पलाइन की सतर्कता से 72 वर्षीय महिला डिजिटल अरेस्ट होने से बचीं

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-रिश्तेदार की सूझबूझ, साइबर रिस्पॉन्डर की तत्परता और रोहिणी साइबर पुलिस की कार्रवाई से करोड़ों रुपये की ठगी का प्रयास नाकाम
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।
1930 साइबर हेल्पलाइन की तत्परता और एक रिश्तेदार की सतर्कता ने 72 वर्षीय महिला को डिजिटल अरेस्ट का शिकार होने से बचा लिया। रोहिणी सेक्टर-13 में अकेले रहने वाली वरिष्ठ नागरिक महिला को ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक फर्जी मामले में फंसाकर घंटों तक अपने प्रभाव में रखा था। समय रहते पुलिस के हस्तक्षेप से महिला को न केवल इस जाल से बाहर निकाला गया, बल्कि उससे किसी भी प्रकार की धनराशि की ठगी होने से भी बचा लिया गया।
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आईएफएसओ के डीसीपी अनयेश रॉय के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 2:45 बजे 1930 हेल्पलाइन पर तैनात साइबर रिस्पॉन्डर कांस्टेबल रेखा को साहिल नामक व्यक्ति का फोन आया। उसने बताया कि उसकी 72 वर्षीय रिश्तेदार से ठीक से बात नहीं हो पा रही है। महिला बेहद घबराई हुई लग रही थीं। बातचीत के दौरान उसने केवल सीबीआई का जिक्र किया था। इस सूचना पर कांस्टेबल रेखा को तुरंत डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड की आशंका हुई। उन्होंने मामले की जानकारी तत्काल 1930 हेल्पलाइन प्रभारी इंस्पेक्टर परवीन कुमार को दी। इंस्पेक्टर परवीन ने बिना देर किए रोहिणी साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को सूचित किया और साथ ही 112 इमरजेंसी सेवा के माध्यम से पुलिस कंट्रोल रूम को भी जानकारी भेजी। सूचना मिलते ही साइबर पुलिस स्टेशन रोहिणी के हेड कांस्टेबल प्रदीप महिला के घर पहुंचे। जांच में सामने आया कि महिला को लैंडलाइन और वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क कर ठगों ने दावा किया था कि उसका नाम छह करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। ठगों ने खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर महिला को डिजिटल अरेस्ट में होने की बात कही और लगातार संपर्क में रहने के लिए मजबूर किया।
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