देश में एम्स का विकल्प नहीं है। एम्स से जुड़ा व्यक्ति जब अपना परिचय देता है तो सामने वाले पर एक अलग ही प्रभाव पड़ता है। यह कहना है देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का। सोमवार को एम्स के 48वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एम्स अपनी काबिलियत के बल पर देश में नंबर वन मेडिकल कॉलेज बना हुआ है। यहां से पढ़कर निकलने वाले छात्र दुनियाभर में कही भी सफल डॉक्टर बन सकते हैं, लेकिन यह पेशा किसी धर्म से कम नहीं है। यह पैसा का साधन नहीं है। एम्स में लोगों की सेवा करने के बाद जो संतुष्टि मिलती है वह कहीं और नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि आज जिन छह पूर्व फैकल्टी को सम्मानित किया गया, उनके बारे में पढ़ें, जानें कैसे उन्होंने इतना लंबा सफर तय किया और आज सबके लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
वहीं स्वास्थ्य सुविधा पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश जब कोरोना महामारी से लड़ रहा था, कुछ लोग थे जो हमारी क्षमता पर सवाल उठा रहे थे। देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न खुद कोरोना से लड़ रहा था, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी मदद पहुंचा रहा था। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी आलोचनाओं से बचना चाहिए। स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी कड़ी मेहनत और गंभीर प्रयासों से देश को कोरोना संकट से बाहर निकाला है। भारत आज दुनिया की फार्मेसी बन गया है। लेकिन हमें आम आदमी के लिए दवाओं को किफायती बनाने की खातिर थोड़ा और काम करना होगा।
अगली पीढ़ी के लिए करें काम
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि दो साल बाद एम्स अपना 50वां दीक्षांत समारोह मनाएगा। ऐसे में जो भी यहां से पढ़कर जाए, उन्हें बुलाया जाना चाहिए। साथ ही एक संकल्प भी लें देश के प्रति। आप अपनी दूसरी पारी के लिए आगे बढ़ेंगे, आपका अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी होगी लेकिन देश को भी आप से काफी आशा है। वहीं, एम्स निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा पिछले साल एम्स ने ओपीडी में 45 लाख मरीजों का इलाज किया। 2 लाख 70 हजार मरीजों का एडमिशन और दो लाख सर्जरी की। 20 हजार से ज्यादा लोगों को आयुष्मान भारत स्कीम का फायदा मिला। उन्होंने कहा कि हम लगातार एम्स को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
करीब ढाई हजार को मिले अवॉर्ड व डिग्रियां
एम्स में सोमवार को समारो में 2494 मेडिकल छात्र, पीएचडी व नर्सेंज को अवॉर्ड व डिग्री दी गई। साथ ही एम्स के पूर्व छह फैकल्टी को लाइव टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। वहीं पिछले तीन साल के कनवोकेशन में अमोल सूद एकलौता डिग्री धारी रहा जिन्हें कुल आठ अवार्ड मिले। वहीं अंजलि सिंघल को पांच अवार्ड मिले।