शहर में जिधर भी नजर दौड़ाकर देखिए, सिंगापुर और शंघाई को मात देती हुई एक से बढ़कर एक बिल्डिंगें खड़ी हैं, लेकिन इन सबके बीच पेड़-पौधे बहुत कम हो गए हैं। ऐसे में यहां प्रदूषण और गर्मी बढ़ रही है।
फॉरेस्ट कवर एरिया अपने मानक 33 फीसदी की जगह मुश्किल से 2 फीसदी ही बचा है। आने वाले दिनों में यह स्थिति लोगों को और परेशान करेगी। जानकार कहते हैं कि इटली और स्विटजरलैंड जैसे देशों की तर्ज पर अब गुड़गांव जैसे बहुमंजिले और शीशे की बिल्डिंगों वाले शहरों में खड़ी वनीकरण (वर्टिकल फॉरेस्टेशन) करना होगा, वरना एक दिन ऐसा आएगा कि गर्मी और प्रदूषण के कारण यहां रहना मुश्किल हो जाएगा।
कई देशों में वर्टिकल फॉरेस्टेशन हो रहा है, जिसमें बिल्डिंग के हर फ्लोर पर पेड़ लगाना होता है, ताकि ऑक्सीजन की कमी न हो, वातावरण गर्म न हो और प्रदूषण में कमी आए। विशेषज्ञों के मुताबिक शहरीकरण के इस दौर में वनों के संरक्षण और जैव विविधता को बचाए रखने का यह एक विकल्प है। पूरे दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा बहुमंजिली और शीशे वाली आलीशान इमारतें गुड़गांव में हैं।