दिल्ली की मंडियों में सब्जियों के भाव में काफी गिरावट है। प्याज, टमाटर ही नहीं, हरी सब्जियों के भाव भी पिछले सप्ताह के मुकाबले कम हुए हैं, लेकिन इसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। क्योंकि, खुदरा बाजार में रेहड़ी-ठेले पर महंगाई में ज्यादा कमी नहीं है। इसके पीछे रेस्टोरेंट का बंद होना तो है ही, साथ ही रेहड़ी-ठेला वालों का अपने मूल प्रदेश भी जाना है। उधर, रिटेलरों को मंडियों में प्रवेश में आने वाली परेशानी के कारण भी खुदरा बाजार में सब्जियों के भाव कम नहीं हो रहे हैं।
आलू-प्याज की बात करें तो पिछले साल इसी महीने में भाव में काफी तेजी थी, लेकिन अभी खरीदारों के कम होने से बिक्री ही नहीं हो रही है। आम दिनों में जहां प्याज की 70 से अधिक गाड़ी आती है वहीं, शनिवार को महज 17 गाड़ी ही मंडी पहुंची। ग्राहक नदारद होने की वजह से प्याज थोक मंडी में 6-9 रुपये प्रतिकिलो रही, जबकि यही प्याज खुदरा बाजार में आम लोगों को 20 रुपये प्रतिकिलो मिल रही है। इसी तरह आलू की बात करे तो थोक मंडी मे 14-17 रुपये प्रतिकिलो रहा। शनिवार को आलू की 33 गाड़ी आई, जबकि अन्य दिनों में 100 गाड़ी रोजाना पहुंचती हैं। इसी तरह टमाटर का भी उठाव नहीं है। शनिवार को टमाटर 4-7 रुपये प्रतिकिलो बिका।
दरअसल, दिल्ली के आसपास से टमाटर थोक मंडी में पहुंचने के कारण भाव गिरे हुए हैं। गर्मी के दिनों में टमाटर जल्दी खराब हो जाते हैं। लिहाजा, इसके भाव इन दिनों कम ही रहते हैं। हरी सब्जियां भी पिछले दिनों के मुकाबले सस्ती हुई हैं। भिंडी जहां 40-50 रुपये खुदरा बाजार में बिक रही तो करेला 40 रुपये। इसी तरह लौकी 20-35 रुपये और परवल का भाव 40-50 रुपये प्रतिकिलो है। ईद के वजह से मंडी में फलों के भाव बढ़े हुए हैं। अनार थोक भाव में 70-90 रुपये प्रतिकिलो है। अंगूर 50-60 रुपये और आम 50 रुपये किलो बिका। हालांकि, खरबूज 7 रुपया प्रतिकिलो बिका।
आजादपुर मंडी के प्याज व्यापारी श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि मंडी में ग्राहक नहीं है। प्याज के भाव काफी कम हो गए हैं। ज्यादातर खुदरा व्यापार करने वाले अपने मूल राज्य चले गए हैं। ऐसे में रिटेल व्यापार करने वाले मंडी नहीं पहुंच पा रहे हैं। रिटेलरों के मंडी में नहीं पहुंचने के कारण ही खुदरा बाजार में भाव में कमी नहीं है। आलू व टमाटर के व्यापारी संदीप खंडेलवाल का कहना है कि थोक भाव में काफी कमी दर्ज की जा रही है। आवक जितनी है, उतनी खपत नहीं है। लोकल टमाटर की आवक ज्यादा है, इस वजह से कीमत में काफी कमी है।