अधिकतर लोग इसे बीमारी मानते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह एक न्यूरो डेवलपमेंटल कंडीशन है, जिसमें बच्चे अलग तरीके से सोचते और व्यवहार करते हैं। जागरूकता की कमी से ऐसे बच्चों के परिवारों को सामाजिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
ऑटिज्म को लेकर समाज में अब भी कई तरह की गलतफहमियां हैं। अधिकतर लोग इसे बीमारी मानते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह एक न्यूरो डेवलपमेंटल कंडीशन है, जिसमें बच्चे अलग तरीके से सोचते और व्यवहार करते हैं। जागरूकता की कमी से ऐसे बच्चों के परिवारों को सामाजिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों में बोलने में देरी, सामाजिक संपर्क में कमी और व्यवहार में भिन्नता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो थेरेपी और विशेष प्रशिक्षण से बच्चों के विकास में काफी सुधार संभव है।
प्रभावित बच्चों के अनुसार व्यवहार की जरूरत
मानव व्यवहार एवं संबद्ध संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश का कहना है कि ऐसे बच्चों को समझने और उनके अनुसार व्यवहार करने की जरूरत होती है। अगर माता-पिता और शिक्षक समय पर ध्यान दें और विशेषज्ञों की मदद लें तो ये बच्चे अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटिज्म से जुड़े मामलों में परिवार, स्कूल और सरकार तीनों की जिम्मेदारी अहम है। जागरूकता अभियान, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और समावेशी शिक्षा प्रणाली से ही इन बच्चों को मुख्यधारा में लाया जा सकता है।