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वाल्मीकि सदन: सावधान! PM मोदी आने वाले हैं

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कभी बेहद शांत और दिल्ली का आम इलाकों में से एक मंदिर मार्ग स्थित वाल्मीकि सदन की हर चीज अब खास दिखने लगी है। अमूमन वाल्मीकि मंदिर की बेरोकटोक आवाजाही पर मंगलवार को बंदिश थी। मुख्य गेट पर सीआरपीएफ के जवान तैनात थे।
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जवानों की परेड बस्ती में भी थी। मंदिर परिसर में आला अधिकारियों की भागदौड़ थी। पार्क की सजावट का काम पूरा था। पुताई होने से पार्क से दिखने वाली कॉलोनी की दीवारों में चमक थी। साफ-सफाई के साथ सड़कों व गलियों को रंगा जा रहा था।
 
इस सबके बीच लोगों में चर्चा सिर्फ दो अक्तूबर की थी। गांधी जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ झाड़ू उठाने का मौका मिलने पर कोई खुश दिखा तो किसी को खुशी प्रधानमंत्री के कॉलोनी में आने से ही है।
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अब तक साथ हैं गांधी जी की यादें

करीब दो हजार की आबादी वाला वाल्मीकि सदन एक बार फिर सुर्खियों में है। यह वही जगह है, जहां महात्मा गांधी ने लंबा समय गुजारा था। गांधीजी मंदिर में 214 दिन गुजारे थे।

बस्ती की मुख्य सड़क पर चौधरी रामकृष्ण पिवाल बैठे थे। इनकी उम्र करीब 90 साल है। लड़खड़ाती जुबान में रामकृष्ण बोले, एक-दो हो तो बताऊं। गांधीजी से जुड़ी बहुत से यादें हैं। सबसे बड़ी बात यह कि वह हमेशा बोलते थे, कि सफाई प्रभु का काम है। इसे सभी को करना चाहिए। उनकी प्रार्थना सभा में बड़े-बड़े लोग आते थे।

वह कच्चे चबूतरे पर बैठते थे। सामने भीड़ होती थी। रघुपति राघव राजा राम का भजन हमेशा होता था। तब से लेकर अब तक, बहुत से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति यहां आए। उनके आने पर पूरा इलाका साफ-सुथरा हो जाता है। लेकिन कुछ ही दिनों में सब गंदा हो जाता है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं।

अच्छी बात है

उन्होंने कहा, अच्छी बात है। हम सभी उम्मीद लगाए हैं। कि शायद इस बार कुछ कर जाएं। पक्का तो कुछ नहीं कह सकते। हम सबकी बड़ी मांग है कि मकानों पर मालिकाना हक मिल जाए। यहां कोई हरियाणा से आया है तो कोई पंजाब, उत्तर प्रदेश से।

गांव में कुछ रहा नहीं। यहां भी नौकरी छूटने से मकान छोड़ना पड़ता है। अब हमें ही देखिए। मकान पहले पिताजी के नाम था, फिर हमारे और अब भाई के। आगे क्या होगा, कुछ भी नहीं पता।

पार्क-फुटपाथ की सजावट जारी
वाल्मीकि बस्ती में एनडीएमसी के कर्मचारी पार्कों में नई मिट्टी डालने के साथ रंग-बिरंगे फूलों के पौधे व घास भी लगा रहे थे। बच्चों के खेलने के लिए पार्कों में लगे झूले तथा दूसरी चीजें बदली गई हैं। वहीं, गलियों की सड़कों की मरम्मत कर फुटपाथ को काले-पीले रंग से रंगीन किया जा रहा था।

'जब भागते हुए मंदिर पहुंचे राजेंद्र प्रसाद और नेहरू'

ऐतिहासिक वाल्मीकि मंदिर के के बारे में प्रधान सुकाराम बताते हैं कि बिरला मंदिर से पहले इसकी स्थापना की गई थी। 1930 में इसे पक्का किया गया। बाद में इसका विस्तार होता रहा। महात्मा गांधी के अलावा यहां देश के लगभग सभी प्रधानमंत्री आए हैं।

एक वाकये का जिक्र करते हुए सुकाराम ने बताया कि एक बार वाल्मीकि सदन की गलियों से गांधीजी गुजर रहे थे। हम सभी साथ चल रहे थे। उस समय मकानों में खिड़की-जंगला नहीं था। गांधीजी एक मकान में घुसे। उसकी हालत देखी। फिर बाहर आकर गली में बैठ गए। किसी से बात भी नहीं की।

इसकी सूचना मिलते ही राजेंद्र प्रसाद व जवाहर लाल नेहरू भागे-भागे आए। सवाल किया तो गांधी जी भड़क गए, देख रहे हो। आदमी क्या, मकानों में घोड़े भी नहीं रह सकते। कैसा इंतजाम है यहां। इसके बाद नेहरूजी ने गांधीजी से बात की। फिर चौबीस घंटे के अंदर सभी मकानों में खिड़की-रोशनदान लग गया।
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वाल्मीकि मंदिर की विशेषता और केजरीवाल का कनेक्‍शन

एक अप्रैल 1946 से एक जून 1947 तक मंदिर महात्मा गांधी का आवास रहा। यहीं से उन्होंने तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन को खत लिखा था। इसे गांधी-इरविन समझौते की शुरुआत माना जाता है। बाद में लार्ड माउंटबेटन भी यहां आए।

राजकुमारी अमृत कौर तथा लार्ड माउंटबेटन की पत्नी गांधीजी के साथ प्रार्थना सभा में शामिल होती थी। इस मंदिर में गांधीजी का चरखा, कपड़ा, ब्रश आदि रखा है। इनका वह इस्तेमाल करते थे।

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने पार्टी के चुनाव निशान को वाल्मीकि सदन से ही लॉन्च किया था। बीते साल तीन अगस्त को पार्टी कार्यकर्ताओं ने पूरी बस्ती में झाड़ू लगाई थी। उस समय केजरीवाल ने ऐलान किया था कि इस पवित्र जमीन से हम अपना सियासी सफर शुरू कर रहे हैं।

हमें यकीन है कि झाड़ू समाज की गंदगी साफ करेगी। बाद में केजरीवाल ने इसी विधान सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। उनकी झाड़ू ऐसी चली कि तीन बार की दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को करारी शिकस्त दी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी इलाके से स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत कर रहे हैं।
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