आप के बागी विधायक अनिल वाजपेयी और कर्नल देवेंदर सेहरावत ने हाईकोर्ट की एकल पीठ के फैसले को दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है।
एकल पीठ ने 8 जुलाई को इन विधायकों की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उनके खिलाफ शिकायत पर सुनवाई से विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल को अलग करने का आग्रह किया गया था। विधायकों का कहना था कि उनके खिलाफ शिकायत पर सुनवाई के लिए कमेटी बनाने का निर्देश दिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ के समक्ष पेश याचिका में अनिल वाजपेयी व देवेंद्र सेहरावत ने शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया है। खंडपीठ ने इसे 19 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्घ करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने 8 जुलाई को विधायकों की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि जो प्रक्रिया रामनिवास गोयल ने अपनाई है, उसमें कोई खामी नहीं है। कोर्ट ने विधायकों की उस दलील को भी खारिज कर दिया था कि अध्यक्ष को पहले उनकी शिकायत का निबटारा करना चाहिए था, जिसमें उन्होंने अध्यक्ष पर ही पक्षपात का आरोप लगाया था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसा कोई कानून नहीं है, जो क्रम से मुद्दों को सुनने व उन्हें सुलझाने के लिए कहता हो। वह सभी मुद्दों को सुनकर उन्हें निबटा सकते हैं। वह विधायकों द्वारा उठाई आपत्तियों को भी सुनेंगे।
हाईकोर्ट ने इस पर भी गौर किया था कि विधानसभा अध्यक्ष की ओर से विधायकों को नोटिस का जवाब देने के लिए दो और दिन का समय दिया गया है। यह नोटिस उन्हें दलबदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने के लिए दी गई शिकायत पर जारी किया गया था।
आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने 10 जून को शिकायत देकर वाजपेयी व सेहरावत पर भाजपा में शामिल होने का आरोप लगाते हुए अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने 17 जून को दोनों विधायकों को नोटिस जारी कर 8 जुलाई तक जवाब मांगा था।