कानुपर किडनी कांड के तार देश की राजधानी दिल्ली से जुड़ने की थ्योरी सामने आते ही हड़कंप मच गया है। दिल्ली के दो बड़े अस्पताल शेख सराय स्थित पुष्पवंती सिंघानिया रिसर्च इंस्टिट्यूट (पीएसआरआई) और फोर्टिस अस्पताल ने इन आरोपों का खंडन किया है। वहीं 19 साल में पांचवी बार देश के किडनी कांड में दिल्ली का नाम सामने आया है।
दिल्ली स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि अभी तक दिल्ली के अस्पतालों की संलिप्तता पाए जाने के ठोस सबूत नहीं मिले हैं। बहरहाल सूत्रों का कहना है कि यूपी और दिल्ली दोनों ही राज्यों की समितियां अब इस मामले की जांच कर सकती हैं।
बताया जा रहा है कि इस घटना पर सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी संज्ञान लिया है। दोनों ही राज्यों को केंद्र की ओर से निर्देश भी मिल सकते हैं। बताया ये भी जा रहा है कि दिल्ली के एक और अस्पताल का नाम कानपुर पुलिस की पूछताछ में सामने आया है। साथ ही किसी पद्मश्री अवॉर्ड प्राप्त डॉक्टर का जिक्र भी आया है।
मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि अंगदान और प्रत्यारोपण को लेकर देश में कठोर कानून व्यवस्था है। इसकी पालना के लिए राज्य स्तर पर कमेटी होती है। उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले में राज्य स्तरीय जांच होनी चाहिए।
दिल्ली स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि अभी तक दिल्ली के अस्पतालों की घटना में संलिप्तता उजागर नहीं हुई है। राजधानी में अंग प्रत्यारोपण को लेकर सख्त कानून लागू हैं।
उन्होंने साफ कर दिया है कि जांच के लिए ठोस सबूतों की जरूरत होती है। कानपुर पुलिस अगर इन सबूतों के साथ मांग करती है तो जांच की जाएगी।
उधर राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) की निदेशक डॉ. वसंती रमेश का कहना है कि इस तरह की घटना वाकई शर्मिंदा करने वाली है।
देश में कठोर नियमों के बावजूद मानव अंगों की तस्करी हो रही है तो पुलिस को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। डॉ. वसंती रमेश का ये भी कहना है कि इस मामले में अगर आगे कोई शिकायत होती है तो राज्य स्तरीय समिति उस पर फैसला लेगी।
पीएसआरआई के दो कर्मचारियों का नाम आया सामने
कानपुर पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद दिल्ली के दो अस्पताल पीएसआरआई और फोर्टिस अस्पताल के नाम का खुलासा किया है।
पीएसआरआई के दो कोर्डिनेटर सुनीता और मिथुन का नाम बताया जा रहा है, लेकिन अस्पताल के मुख्य अधिकारी संजीव गुप्ता का कहना है कि सुनीता पिछले पांच वर्ष से किडनी कोर्डिनेटर के तौर पर काम कर रही हैं और मिथुन एक साल से लिवर प्रत्यारोपण के लिए कोर्डिनेटर हैं।
संजीव गुप्ता ने प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया को बताते हुए अस्पताल पर लगे आरोपों का स्पष्ट रुप से खंडन किया है। उनका कहना है कि उच्च स्तरीय प्राधिकरण समिति में तमाम दस्तावेजों और वीडियो रिकॉर्डिंग के बाद ही मंजूरी दी जाती है।
फोर्टिस अस्पताल का इंकार, नहीं है कोई कर्मचारी
फोर्टिस अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा है कि उनके यहां प्रत्यारोपण से पहले एक समिति की मंजूरी ली जाती है। इस समिति में अस्पताल के अलावा बाहरी अधिकारी भी शामिल हैं।
कई बार दस्तावेज पूरे न होने के कारण प्रत्यारोपण की मंजूरी नहीं भी दी जाती। इनका कहना है कि कानपुर पुलिस ने जिन आरोपियों को पकड़ा है, उनमें से किसी का भी अस्पताल या कर्मचारियों से लेना देना नहीं है।