पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आयोजित कॉप-14 सम्मेलन के मंच से जहां पीएम मोदी देश से सिंगल यूज प्लास्टिक को गुडबॉय कहने का आह्वान कर रहे थे, उसी आयोजन में प्लास्टिक का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा था। संयुक्त राष्ट्र सीसीडी के इस 12 दिनी आयोजन में पांच हजार प्लास्टिक की पानी की बोतलें और सैकड़ों प्लास्टिक प्लेटों का इस्तेमाल किया गया। आयोजन में 196 देशों से आठ हजार प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
नई दिल्ली को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के प्रस्ताव की घोषणा से महज सात घंटे पहले भारत के मंडप में जुटे तमाम पर्यावरणविदों की मौजूदगी में खाना और पानी दोनों सिंगल यूज प्लास्टिक में ही परोसा गया। यही नहीं अन्य देशों के मंडपों में भी इसका जमकर इस्तेमाल हो रहा था।
इस बाबत जब आयोजन की पूरी व्यवस्था देख रही कंपनी इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के प्रतिनिधि हेमंत पुरी से पूछा गया तो वह यही दावा करते हरे कि सम्मेलन में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं हुआ। फिर बाद में उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी पर्यावरण मंत्रालय से मिलेगी। लेकिन जब उनसे व्यवस्था का हवाला देकर सवाल किया गया तो बगले झांकने लगे और कुछ कहने से इनकार कर दिया।
मंत्रालय बोला, जिसका जिम्मा वही कार्रवाई करे
पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उनके संज्ञान में कुछ नहीं आया। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने आयोजन का जिम्मा आईईएमएल को सौंपा था। इसलिए अगर सम्मेलन के दौरान सिंगिल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया तो यह कंपनी का दायित्व था कि वह कार्रवाई करती।
सबकी थी जिम्मेदारी: देवेंद्र पांडे
भारतीय वन सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक डॉ. देवेंद्र पांडे ने कहा, सरकार प्लास्टिक का विकल्प क्यों नहीं देती। कॉप-14 सम्मेलन में अगर प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा था तो इसकी जिम्मेदारी सबकी है। मंत्रालय की, विशेषज्ञों की और प्रबंधन की इनका दायित्व था कि वह इसे रोकें।
इस लिए मुश्किल है डगर
170 करोड़ टन प्लास्टिक की सालाना खपत होती है देश में
26 हजार टन प्लास्टिक कचरा देश में हर दिन निकल रहा
60 फीसदी केवल 15384 टन कचरा वापस आता है
इन राज्यों में सबसे अधिक इस्तेमाल
देश में सबसे अधिक सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पंजाब में होता है।