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UPSC: छात्रों की उग्र प्रदर्शन की चेतावनी

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सरकार ने संसद में सोमवार को भले ही यूपीएससी परीक्षार्थियों के लिए सी-सैट में बदलाव की घोषणा की हो, लेकिन प्रदर्शनकारी पूरी तरह रोल बैक (वापस लेने) की मांग पर अडे़ हैं।
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उनका कहना है कि वह अंग्रेजी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन तकनीकी, प्रबंधन के छात्रों को मिलने वाली वरीयता के खिलाफ हैं। छात्रों ने सी-सैट पूरी तरह से वापस न लेने पर मंगलवार से देशभर में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

संसद में सोमवार को पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए सी-सैट हटाने की बजाय पेपर से 9 प्रश्नों के साढ़े 22 नंबर को मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ने और वर्ष 2011 के छात्रों को दोबारा वर्ष 2015 में परीक्षा देने का मौका देने की बात कही है, लेकिन परीक्षार्थी इससे नाखुश हैं।
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सी-सैट पर सरकार का पक्ष एक साजिश

राष्ट्रीय अधिकार मंच के छात्रों का कहना है कि सरकार का निर्णय वास्तविक मांगों के विरुद्ध है। छात्रों का मूल मुद्दा सी-सैट पेपर को हटाने का था। सरकार के वर्ष 2011 में परीक्षा देने वाले छात्रों को वर्ष 2015 में दोबारा मौका देने की बात का स्वागत करते हैं, लेकिन सी-सैट को रोल बैक किए बगैर वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।

एक परीक्षार्थी विवेक का कहना है कि सी-सैट पर सरकार ने सदन में जो फैसला दिया है, यह छात्रों के खिलाफ हो रही साजिश को और मजबूती प्रदान करता है। सरकार बेशक सी-सैट पेपर में अंग्रेजी कंप्रीहेंशन के नौ प्रश्नों के साढ़े 22 नंबरों को मेरिट में नहीं जोड़ने की बात कर रही है, लेकिन हिंदी कंप्रीहेंशन के 30- 36 प्रश्न जो कि हिंदी भाषा के आते हैं, उनका अनुवाद कठिन होता है।  यह प्रश्न हिंदी समेत क्षेत्रीय भाषी क्षेत्रों से आने वाले परीक्षार्थियों की मूल भावना के विपरीत है।
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विरोध में प्रदर्शन करेंगे

एक परीक्षार्थी सुमित के अनुसार यूपीएससी परीक्षार्थियों को कभी भी अंग्रेजी भाषा से विरोध नहीं है, बल्कि हम सी-सैट हटाने की मांग कर रहे थे। क्योंकि सी-सैट पेपर में तकनीकी खामी है, जिसका विरोध किया जा रहा है।

सदन में सरकार के पक्ष से साफ होता है कि वे अंग्रेजी भाषा का हवाला देकर असली मांग को पूरा करने के आश्वासन से हट रही है। अंग्रेजी मुद्दा होता तो सी-सैट के साथ-साथ मुख्य परीक्षा में वर्ष 1979 से लागू अंग्रेजी अनिवार्य पेपर का भी विरोध करते, जोके तीन सौ नंबरों का क्वालीफाइंग होता है।

राष्ट्रीय अधिकार मंच के संजीव कुमार ने बताया कि मंगलवार से सरकार के इस फैसले के खिलाफ आंदोलन तेज होगा। राजधानी समेत देश के सभी हिस्सों में विरोध प्रदर्शन उग्र किया जाएगा। सी-सैट पेपर के रोल बैक के बगैर उन्हें कोई मांग स्वीकार नहीं है।
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