दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के मुख्यालय में शुक्रवार को अनाधिकृत कालोनियों में विकास कार्यों के लिए एनओसी लेने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। इस बैठक की अध्यक्षता महापौर संगीता कांगड़ा ने की और इसमें निगमायुक्त ज्ञानेश भारती भी उपस्थित थे। यह बैठक वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट प्रस्ताव पर चर्चा के लिए की गई थी।
इस बैठक में नेता सदन कमलजीत सहरावत ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकृत कालोनियों में विकास कार्य कराने का जिम्मा निगम पार्षदों का है लेकिन अनाधिकृत कालोनियों में विकास की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है।
इसी बीच उन्होंने कहा कि अधिकृत कालोनियों में कोई भी विकास कार्य करने के लिए दिल्ली सरकार को निगम से एनओसी लेनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। इसके बाद नेता विपक्ष किशनवती ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि जिस क्षेत्र में दिल्ली सरकार विकास कार्य करती है, वहां के पार्षद एनओसी देते ही नहीं हैं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा हुआ।
वहीं संगम विहार वार्ड की पार्षद माया सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में मानुषी नामक गैर सरकारी संस्था को 2007 में निगम ने 160 दुकानें चलाने के लिए दी थीं। इन दुकानों को लोगों को किराये पर दे दिया गया लेकिन 2007 से अब तक कोई राजस्व निगम को नहीं मिला।
उन्होंने मांग की कि इन दुकानों को खाली करवाकर नए सिर से आवंटित किया जाए ताकि निगम को राजस्व मिले। इन दुकानों से अब तक निगम को करोड़ों रुपए का राजस्व मिल सकता था जो नहीं मिला।