सुप्रीम कोर्ट ने रियल इस्टेट के प्रमुख कारोबारी सुशील और गोपाल अंसल को अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया है। अंसल बंधु उपहार सिनेमा अग्निकांड में दोषी ठहराये गये हैं।
जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुशील और गोपाल अंसल अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जायेगे। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च को अदालत की अनुमति के बिना सुशील अंसल के विदेश जाने पर अप्रसन्नता व्यक्त की थी।
लेकिन अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी के इस आश्वासन के बाद अंसल को अमेरिका में रुकने की अनुमति दे दी थी कि वह 11 अप्रैल तक स्वदेश आ जायेंगे।
सुशील अंसल इलाज के सिलसिले में अमेरिका गये थे। सुशील अंसल के वकील ने बाद में सुप्रीम कोर्ट को उनके भारत लौट आने की सूचना दी थी। सुप्रीम कोर्ट उपहार अग्निकांड त्रासदी के पीड़ितों के संगठन की अर्जी पर सुनवाई कर रहा था।
इस अर्जी में अंसल के अदालत की अनुमति के बिना ही विदेश जाने का मसला उठाया गया था। संगठन का तर्क था कि अंसल बंधुओं को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पाया है। इसलिए वे अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकते हैं।
पीठ ने अंसल बंधुओं की सजा का मालला जुलाई में तीन सदस्यीय बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पांच मार्च को 1997 के उपहार हादसे में अंसल बंधुओं को दोषी ठहराया था और कहा था कि वे सिनेमाप्रेमियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय पैसा बनाने में अधिक रुचि रखते थे।
सर्वोच्च अदालत ने सुशील और गोपाल अंसल को दोषी माना है। लेकिन सजा की अवधि को लेकर जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर और जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र ने अलग अलग फैसला दिया था। जस्टिस ठाकुर ने दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से दी गई एक साल की सजा को उचित ठहराया था।
जबकि जस्टिस मिश्र ने दो साल की सजा सुनाई थी। सजा की अवधि को लेकर जजों में मतभेद के चलते यह मामला सिर्फ सजा का मकसद से तीन सदस्यीय बेंच को सौंपा गया है। उपहार अग्निकांड में 59 लोगों की मौत हो गई थी।