गौतमबुद्ध नगर में केंद्रीय मंत्री व सांसद डॉ. महेश शर्मा और सपा राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र सिंह नागर के बीच विधानसभा चुनाव में फिर आमना-सामना है।
सूत्र बताते हैं कि डॉ. महेश ने अपने पसंदीदा दादरी से तेजपाल नागर, जेवर से धीरेंद्र सिंह और नोएडा से अभी नाम घोषित नहीं, लेकिन संभावना है कि उनकी ही चलेगी। इसी तरह से सुरेंद्र ने भी शुक्रवार को दिखा दिया कि उनकी ही मर्जी से नोएडा में सुनील चौधरी, दादरी में राजकुमार भाटी और जेवर से नरेंद्र नागर को टिकट मिला है।
दरअसल, जिले की राजनीति 2009 से ही शुरू होती है। लोकसभा के पहले चुनाव में बसपा की तरफ से सुरेंद्र सिंह नागर और भाजपा की तरफ से डॉ. महेश शर्मा लड़े थे। जबरदस्त मुकाबला हुआ था और बाजी सुरेंद्र सिंह नागर ने मार ली थी। इसके बाद फिर दोबारा 2014 में जब चुनाव का वक्त आया तो भाजपा से डॉ. महेश शर्मा को तो टिकट मिल गया, लेकिन सुरेंद्र बसपा को छोड़ सपा में चले गए और चुनाव नहीं लड़ा।
हालात यह हो गए कि डॉ. महेश का मुकाबला करने वाला कोई नहीं सामने था। लिहाजा, वह भारी मतों से जीत गए। एक तरफ डॉ. महेश शर्मा सांसद बनने के बाद केंद्र में मंत्री बन गए। उनका भाजपा में काफी बड़ा कद हो गया और पीएम समेत अन्य बड़े नेताओं से नजदीकी लगातार बढ़ रही हैं। जबकि सुरेंद्र ने सपा ज्वाइन की तो इसके बाद वह सपा में राष्ट्रीय महासचिव बने। राज्यसभा चुनाव भी जीत गए। उनकी पैठ प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव के साथ है। चूंकि प्रदेश में विधानसभा का चुनाव है तो सीएम उनसे कई बार राय मशविरा भी करते रहते हैं।
विरोध भी हैं जबरदस्त
दोनों नेताओं के साथ एक बात और समान रूप से हो रही है। जब अपने मनपसंद प्रत्याशी उतारे तो दूसरे नेता नाराज हो गए। दो दिन पहले डॉ. महेश शर्मा का डीएनडी पर पुतला फूंक दिया गया। सुरेंद्र सिंह नागर के खिलाफ भी बगावत की नौबत आ चुकी है। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो पर कालिख पोतकर पोस्ट कर दी गई है। हालांकि, दोनों नेता लोगों से कह रहे हैं कि चुनाव में टिकट किसे मिले, यह हाईकमान ही तय करता है। टिकट मिलने से पहले प्रत्याशी चयन के लिए सर्वे टीम काम करती है। अब दोनों नेताओं के सामने चुनौती है कि पार्टी मेें नाराजगी कैसे दूर होगी और अपने-अपने प्रत्याशियों को किस तरह से जिताएंगे।