मौर्य ने अपने संबोधन में सम्राट अशोक महान और मौर्य साम्राज्य के इतिहास का उल्लेख किया। अशोक ने बुद्ध के विचारों को अपनाकर मानव कल्याण और शांति का मार्ग बढ़ाया। उनके शासनकाल में भारतीय संस्कृति, प्रशासनिक दक्षता और बौद्ध दर्शन का व्यापक विस्तार हुआ। मौर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आध्यात्मिक धरोहर को मिली वैश्विक प्रतिष्ठा का जिक्र किया। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में बुद्ध के पवित्र अवशेष विभिन्न देशों में भेजे गए। इससे करोड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं को दर्शन का सौभाग्य मिला। मौर्य ने रूस में बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों के साथ यात्रा का अनुभव साझा किया। वहां बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबियों ने अवशेषों के दर्शन किए और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। उन्होंने इस अनुभव को भारत की सांस्कृतिक शक्ति और बुद्ध के सार्वभौमिक संदेश की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण बताया। उप मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी से बुद्ध के आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
प्रतिभा सम्मान और सामाजिक चेतना
मौर्य ने समारोह में प्रतिभा सम्मान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं और युवाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा, संस्कार और सामाजिक चेतना ही समाज की वास्तविक शक्ति हैं। प्रतिभाओं का सम्मान समाज को नई दिशा देने का माध्यम है। यह युवाओं को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
समारोह में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी उपस्थित थे। ऑल इंडिया सैनी सेवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिलबाग सिंह सैनी भी मौजूद रहे। पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य और पूर्व विधायक ममतेश शाक्य भी समारोह में शामिल हुए। अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और शिक्षाविद् भी उपस्थित रहे।