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उन्नाव कांड: दोषी ठहराने से पहले जज ने की पीड़िता की तारीफ, सुनकर बेहोश हुए सेंगर

Tue, 17 Dec 2019 04:16 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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कुलदीप सिंह सेंगर
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'एक शक्तिशाली व्यक्तित्व के खिलाफ पीड़िता का बयान सच्चा और पर्याप्त है'- यह टिप्पणी करते हुए तीस हजारी कोर्ट ने सोमवार को उन्नवा दुष्कर्म मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया। हालांकि इस मामले में अदालत ने सेंगर की सहयोगी आरोपी शशि सिंह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। 

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सेंगर के खिलाफ सजा को लेकर बुधवार को अंतिम बहस होगी। जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि यौन उत्पीडन को लेकर पीड़िता द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ दिया गया बयान सत्य और मुकम्मल है। चूंकि पीड़िता एक गांव की लड़की है, वह एक महानगरीय शिक्षित क्षेत्र से नहीं है। 

वह धमकियों से डरी हुई थी, इसलिए उसने आरोपी के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत जुटाने के लिए समय लिया। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए सेंगर को आईपीसी की धारा के तहत दुष्कर्म और पोक्सों के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट का यह फैसला सुनकर सेंगर परेशान होकर बेहोशी जैसी हालत में पहुंच गया।
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कोर्ट ने इस तथ्य पर भी संज्ञान लिया कि पीड़िता द्वारा सेंगर के खिलाफ जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखे गए तो उसके बाद पीड़िता के परिवार के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए और उनमें सेंगर के संलिप्तता पाई गई। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई की ओर से आरोपपत्र दायर करने में की गई देरी पर भी हैरानी जताई, जिसकी वजह से पीड़िता को न्याय मिलने में देरी हुई और सेंगर व उसके अन्य साथियों के खिलाफ लम्बा ट्रायल चलाया गया।

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कोर्ट ने पोक्सो के बारे में कहा कि बच्चों के साथ यौन उत्पीडन की घटनाओं को देखते हुए पोक्सो एक्ट बनाया गया था। यह कानून बच्चों को ऐसे मामलों में न्याय दिलाने के लिए बिल्कुल उचित है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस कानून के क्रियान्वयन और संबंधित अधिकारियों में मानवीय दृष्टिकोण की कमी के कारण इस मामले में पीड़िता को न्याय मिलने में देरी हुई। कोर्ट ने सीबीआई की खिंचाई करते हुए कहा कि खुद सीबीआई ने जांच और अभियोजन से संबंधित नियम का पालन नहीं किया।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में जब पीड़िता नाबालिग थी, तब कुलदीप सिंह सेंगर ने उसका अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अपने साथियों के सहयोग से अंजाम दिया था। इस मामले में कोर्ट ने सेंगर की सहयोगी शशि सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए थे। कोर्ट ने सेंगर के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी (अपराधिक षड़यंत्र), 363 (अपहरण), 366 (अपहरण और महिला को शादी के लिए मजबूर करना), 376 (दुष्कर्म) और पोक्सो के तहत आरोप तय किए थे। जुलाई में पीड़िता की कार पर ट्रक के जानलेवा हमले के बाद इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर की गई थी। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी।
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