कोर्ट ने पोक्सो के बारे में कहा कि बच्चों के साथ यौन उत्पीडन की घटनाओं को देखते हुए पोक्सो एक्ट बनाया गया था। यह कानून बच्चों को ऐसे मामलों में न्याय दिलाने के लिए बिल्कुल उचित है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस कानून के क्रियान्वयन और संबंधित अधिकारियों में मानवीय दृष्टिकोण की कमी के कारण इस मामले में पीड़िता को न्याय मिलने में देरी हुई। कोर्ट ने सीबीआई की खिंचाई करते हुए कहा कि खुद सीबीआई ने जांच और अभियोजन से संबंधित नियम का पालन नहीं किया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में जब पीड़िता नाबालिग थी, तब कुलदीप सिंह सेंगर ने उसका अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अपने साथियों के सहयोग से अंजाम दिया था। इस मामले में कोर्ट ने सेंगर की सहयोगी शशि सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए थे। कोर्ट ने सेंगर के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी (अपराधिक षड़यंत्र), 363 (अपहरण), 366 (अपहरण और महिला को शादी के लिए मजबूर करना), 376 (दुष्कर्म) और पोक्सो के तहत आरोप तय किए थे। जुलाई में पीड़िता की कार पर ट्रक के जानलेवा हमले के बाद इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर की गई थी। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी।