घर खरीददारों से धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को मिल रही सुविधाएं सुप्रीम कोर्ट ने वापस लेने का आदेश दिया है। फोरेंसिक ऑडिट में कंपनी के सहयोग न करने से नाराज कोर्ट ने कहा कि चंद्रा बंधुओं से जेल नियमों के मुताबिक सामान्य कैदियों जैसा व्यवहार किया जाए। 2017 में कोर्ट ने घर खरीदारों को पैसे वापस करने और निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए चंद्रा बंधुओं को जेल में अपनी कंपनी के अधिकारियों और वकीलों के साथ बैठक करने की सुविधा देने का निर्देश दिया था।
बृहस्पतिवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच के समक्ष फोरेंसिक ऑडिटर ने बताया कि यूनिटेक जांच में सहयोग नहीं कर रही है। कंपनी के अधिकारी लेन-देन का ब्यौरा नहीं दे रहे हैं। इससे यह नहीं पता लग पा रहा घर खरीददारों का पैसे कैसे दूसरे प्रोजेक्ट में लगा दिया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि उनके पास मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया।
हालांकि कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया लेकिन अगली सुनवाई पर इस मामले में अटॉर्नी जनरल से सलाह मांगी है। बेंच ने कहा कि वह अटॉर्नी जनरल से जानना चाहती है कि क्या घर खरीददारों के हितों की रक्षा के लिए सरकार यूनिटेक प्रबंधन और उससे जुड़ी कंपनियों का अधिग्रहण कर सकती है? बेंच ने कहा कि अटॉर्नी जनरल इस बारे भी राय दें कि क्या गाढ़ी कमाई का पैसा लगाने वालों के हित की रक्षा के लिए सरकार केंद्रीय निर्माण एजेंसियों की मदद से अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा कर सकती है?
इस मामले के न्यायमित्र एडवोकेट पवनश्री अग्रवाल ने कोर्ट के बताया कि गुरुग्राम नगर निगम यूनिटेक की करोड़ों रुपये की संपत्ति बेचने के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इस पर बेंच ने कहा कि जब तक इस लंबित याचिका का निपटारा नहीं होता, नीलामी प्रक्रिया पर रोक रहेगी। गौरतलब है कि चंद्रा बंधु 2017 से इस मामले में जेल में हैं। 7 दिसंबर 2018 को कोर्ट ने इस मामले में फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया था।