आशियाना का सपना देखने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश बड़ी राहत लेकर आई है। निवेशकों की माने तो यूनीटेक कंपनी ने अपना विश्वास तोडने के साथ घर बनाने के सपने पर ग्रहण लगा दिया है।
लोग किराये के मकान में रहने को मजबूर है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने एक फैसले में यूनिटेक के विस्टाज फ्लैट के निवेशकों को ब्याज समेत रुपया लौटाने का आदेश दिया है।
हेरिटेज सिटी में 50 हजार रुपया किराया देने वाले विकास कौल एयरटेल कंपनी में काम करते थे। वर्ष 2009 में 50 लाख रुपया देकर फ्लैट बुक कराया। जिसमें 40 लाख रुपया बैंक से लोन लिया। वर्ष 2012 में फ्लैट पर कब्जा मिलना था।
कब्जा मिलना तो बिल्क उसके लिए लगाये पैसे को वापस पाने में नौकरी चली गई। ऐसे में मकान का किराया 50 हजार और 40 हजार ईएमआई देना पड़ रहा है। फ्लैट तो मिला नहीं न मिलने की संभावना है। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बैंक का लोन तो देना पड़ेगा।
विकास कौल कहते हैं कि यूनीटेक उनके खिलाफ डेढ़ साल पहले सुप्रीम कोर्ट गई थी। उनके सामने कपिल सिब्बल व मनु सिंघवी जैसे वकील के सामने वकील खड़ा करने का उनके पास पैसा नहीं था। ऐसे में छह दोस्तों ने खुद लड़ाई लड़ी है।
दिल्ली के सरकारी स्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत सेक्टर-56 निवासी नरेश पाल का सपना था कि गुडग़ांव में उनका एक छोटा सा आशियाना हो। हुडा के सेक्टर 70 में यूनिटेक बिल्डर के विस्टाज प्रोजेक्ट में फ्लैट का सपना लेकर करीब छह वर्ष पहले 2010 में 40 फीसदी रकम जमा कराया।
आशियाने के इंतजार में 25 हजार रुपया प्रति माह किराये पर फ्लैट ले लिया। इस उम्मीद की साथ कि अब जल्द ही अपना आशियाना होगा और हर महीने के किराये से मुक्ति मिलेगी।
लेकिन इस रकम के बाद बिल्डर ने अगली पेमेंट ही नहीं मांगी। बकौल नरेश पाल, अब प्रापर्टी का रेट इतना बढ़ गया है कि अपनी छत होना तो सपना बन कर रह गया है। वह कहते हैं कि जब फ्लैट बुक किया तो उनका बेटा कक्षा सात में पढ़ता था। अब वह 12वीं में है। अब उसकी शिक्षा देखें या फ्लैट देंखें।
मूलरुप से चंडीगढ़ के रहने वाले टिपुन धीमान इंडिगो में एकाउंट में कार्यरत है। दिल्ली में नौकरी के कारण अपने फ्लैट में रहने का सपना देखा। फ्लैट बुक करने के बाद उसके पास की सोसायटी जीपीएल में 23 हजार रुपये प्रति माह की दर से फ्लैट किराये पर लिया।
सोचा था कि इसी के बगल में शिफ्ट हो जाएगें। पर बिल्डर ने झूठ बोल-बोल कर परेशान कर दिया। आलम यह है कि अब लोगों का बिल्डर से विश्वास उठ गया है। अब वह कभी निर्माणाधीन साइट पर प्लान ही नहीं करेंगे।
क्या है प्रोजेक्ट..
हुडा के सेक्टर 70 में विस्टाज प्रोजेक्ट आना था। कुल 1235 फ्लैट थे। वर्ष 2009 में प्रोजेक्ट लांच हुआ। वर्ष 2012 में कब्जा मिलना था। कुल पांच ब्लाक थे। एक ब्लाक में 10 टावर थे। एक टावर 14 मंजिल का था।
इसे भी जाने..
: वर्ष 2009 में प्रोजेक्ट लांच हुआ।
: वर्ष 2012 कब्जा न मिलने पर बिल्डर के खिलाफ कमीशन में गए।
: कमिश्रन की बात न मानने पर सुप्रीप कोर्ट गए।
: सुप्रीम कोर्ट में पैसा न होने के कारण छह लोगों ने खुद जिरह की।
: 39 लोगों में बहुत से विदेश में जॉब कर रहे हैं।