रिपोर्ट में डीजी और अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी की गई है। उनकी बैरक को कंबल और बोर्ड से ढका गया था, ताकि बाहर की धूल और बदबू नहीं आए। हाईकोर्ट ने पूरे मामले का संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका में बदल दिया।
अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा काम संभव नहीं है। यह तिहाड़ के अधिकारियों, डीजी (जेल) के भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला है। - रमेश कुमार, सत्र न्यायाधीश द्वितीय
जेल में मिले आराम के सामान
जेल में चंद्रा बंधुओं को अलग से कार्यालय दिया गया था, जहां इंटरनेट कनेक्शन और प्रिंटर के साथ कंप्यूटर भी था। उनके पास आरामदायक गद्दे, सरसों का तेल, फुट मैट, बोतलबंद पानी और स्टूल भी मिले। हालांकि, चंद्रा बंधुओं ने दावा किया कि उन्होंने जेल की कैंटीन से पानी खरीदा है। जांच में पता चला कि कैंटीन में दूसरे ब्रांड का बोतलबंद पानी उपलब्ध था।