भूखंड आवंटन रद्द के बाद प्राधिकरण का कहना है कि बिना नक्शा पास कराए यहां 17 टावरों का काम शुरू किया गया यानी प्रोजेक्ट का लेआउट प्लान मंजूर नहीं था। फिर बैंकों ने खरीदारों को लोन कैसे दे दिया। अगर जांच की गई तो यहां भी घालमेल की बात सामने आ सकती है।
मामला कोर्ट में था तब भूखंड कैसे हुआ निरस्त
खरीदारों का कहना है कि 2017 और 2018 में तीन बार कोर्ट के निर्देश आए। इसमें कहा गया था कि प्राधिकरण कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकता। इसके अलावा खरीदार, बिल्डर और प्राधिकरण के बीच बैठक भी हुई, लेकिन खरीदारों के सवाल का प्राधिकरण ने जवाब नहीं दिया। खरीदारों का कहना है कि इस भूखंड को निरस्त करने पर कोर्ट की अवमानना का मामला बन सकता है।
10 प्रतिशत भुगतान करने वाले बिल्डर जस के तस
यूनिटेक के खरीदारों का कहना है कि प्राधिकरण के पास ऐसे कई डिफॉल्टर बिल्डर हैं, जिन्होंने केवल 10 प्रतिशत भुगतान किया है, लेकिन उनका आवंटन निरस्त नहीं हुआ है, जबकि यहां 40 प्रतिशत भुगतान किया गया था। इसके बावजूद भूखंड निरस्त कर दिया गया।
भूखंड वापस क्यों नहीं किया गया
यूनिटेक ने 35 एकड़ जमीन वापसी का आवेदन प्राधिकरण में किया था, लेकिन प्राधिकरण ने आवेदन को खारिज कर दिया। अगर यह भूखंड वापस हो जाता तो शायद बची जमीन में निर्माण कार्य पूरा हो जाता। हालांकि, खरीदारों का कहना है कि आखिर में भूखंड आवंटन निरस्त कर बिल्डर को ही फायदा पहुंचाया गया।
सेक्टर-113 यूनिटेक
- 1912 फ्लैट बनने थे
- 17 टावर बनने थे
- 02 टावर का ढांचा खड़ा है
- 04 टावर की नौ से दस मंजिल के ढांचे बने
- 06 टावर की दो मंजिल तक का ढांचा बना
- 04 टावर के बेसमेंट तैयार
- 01 टावर के बेसमेंट की खुदाई
- 12 मंजिलें भूतल के साथ हर टावर में बननी थीं