एआई को रोग निगरानी और रोकथाम से लेकर निदान और उपचार तक संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एकीकृत किया गया है। लेकिन चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं बल्कि एक कला भी है। स्वास्थ्य सेवा सिर्फ एल्गोरिदम पर नहीं, मानवीय स्पर्श, सहानुभूति, करुणा और संचार पर भी निर्भर करती है। ये ऐसे गुण हैं जिनकी नकल मशीनें नहीं कर सकतीं और ये हमेशा चिकित्सकों के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को इस टिप्पणी के साथ ऐसी आशंकाओं को निराधार करार दिया कि एआई डॉक्टरों की जगह ले सकता है। उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि यह प्रौद्योगिकी पूरे चिकित्सा जगत के लिए फायदेमंद साबित होगी।
एआई इम्पैक्ट समिट में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने कहा कि एआई का उद्देश्य संवर्धन और सहायता करना है, चिकित्सकों को प्रतिस्थापित करना नहीं। नियमित और उच्च गहन कार्यों के बोझ को कम करके एआई डॉक्टरों को जटिल मामलों और महत्वपूर्ण नैदानिक निर्णय लेने के लिए अधिक समय देने में सक्षम बनाता है।
जटिल मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे विशेषज्ञ : केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने रोग निगरानी से लेकर रोकथाम, निदान और उपचार तक संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली में एआई को एकीकृत कर लिया है। अनुप्रिया ने कहा, रोजमर्रा के साधारण और अधिक संख्या में आने वाले मामले एआई निपटाएगा और चिकित्सक या हमारे विशेषज्ञ जटिल मामलों या नैदानिक फैसले लेने पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
हम 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विकास के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। भारत की विशाल और विविध जनसंख्या, ग्रामीण-शहरी विभाजन बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में. प्रौद्योगिकी अपरिहार्य सक्षमकर्ता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की स्थिति बेहतर होगी : पॉल
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रोफेसर वीके पॉल ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य को बदलने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में प्रगति में तेजी लाने का अवसर प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि एआई आरंभिक निदान में सक्षम बनाकर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बना सकता है।
रॉयल फिलिप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रॉय जैकब्स ने कहा, एआई का सबसे बड़ा प्रभाव स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में होगा। बढ़ती मांग, कर्मचारियों की कमी और देखभाल की बढ़ती जटिलता के कारण विश्व भर में स्वास्थ्य प्रणालियां अत्यधिक दबाव में है, और एआई का एकीकरण न केवल एक अवसर बल्कि एक आवश्यकता बन गया है।