दिल्ली सरकार के खिलाफ बेरोजगार सिविल डिफेंस बस मार्शल सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। लगभग 10 हजार से अधिक बेरोजगार मार्शलों ने अपने स्थायी रोजगार बहाली की मांग को लेकर बुधवार को जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन करने का एलान किया है।
इनमें महिलाएं और पुरुष जवान शामिल होंगे, जो भाजपा सरकार की चुनावी वादों को पूरा न करने पर खुली चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा की कोठी से लेकर जंतर-मंतर तक मार्च प्रदर्शन की शुरुआत कल सुबह 7:30 बजे होगी। इसके अलावा सैकड़ों बेरोजगार मार्शल दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा से मुलाकात के लिए उनके आवास पर पहुंचेंगे।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जब आम आदमी पार्टी सत्ता में थी, तब विपक्ष में भाजपा के दिल्ली विधायक विजेंद्र गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और नेता कपिल मिश्रा ने इन्हें पूर्ण रोजगार का आश्वासन दिया था। भाजपा सरकार बनने के बाद दो महीने में पक्की नौकरी देने का वचन दिया गया था, लेकिन आठ महीने बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पूर्व बस मार्शल मुकेश पाल सिंह ने आरोप लगाया कि हमारे नेता वचन तो देते हैं, लेकिन कानों पर जूं नहीं रेंगती। मार्शलों का कहना है कि अगर भाजपा अपना वादा पूरा नहीं कर सकती, तो खुलकर कह दे।
डीबीसी कर्मचारी आज करेंगे सचिवालय तक मार्च
एमसीडी के जन स्वास्थ्य विभाग के डीबीसी व अन्य कर्मचारियों की हड़ताल लगातार नौवें दिन भी जारी है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों का समाधान नहीं करता, हड़ताल जारी रहेगी। वह बुधवार को राजघाट से लेकर दिल्ली सचिवालय तक मार्च करेंगे और अपनी मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता काे ज्ञापन देंगे।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें समान वेतन, मेडिकल लीव और मृत्यु पर परिवार को नौकरी का प्रावधान हैं। डीबीसी से एमटीएस बनने के बाद भी वे अलग-अलग वेतन स्केल (14,000 से 27,000 रुपये) में भुगतान प्राप्त कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि खतरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले उनके परिवार की सुरक्षा के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ पार्षद व एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कर्मचारियों से मुलाकात का उनकी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब से ये कर्मचारी हड़ताल पर हैं, दिल्ली में डेंगू और मलेरिया का खतरा तेजी से बढ़ गया है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि 5,200 कर्मचारियों को हड़ताल पर भेज कर सालाना 60 करोड़ रुपये बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि यही कर्मचारी दिल्लीवासियों की सुरक्षा और मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए काम करते हैं।