दिल्ली से भागकर शम्मी मुंबई पहुंचा। वहां पहुंचते ही शम्मी ने छोटा राजन के खास गुर्गे और उसके सहयोगी आलोक खेड़ा उर्फ बब्बू की गोली मारकर हत्या कर दी। आलोक खेड़ा मुंबई में बार का मालिक था। इसको लेकर उसका अपनी पत्नी आशा से झगड़ा हो गया। आशा के कहने पर ही शम्मी ने आलोक खेड़ा की हत्या की। इसके बाद लगातार शम्मी आशा के संपर्क में रहता। आशा दिल्ली आई तो शम्मी ने उसे अशोक विहार इलाके में पनाह दिलवाई।
हमले के बाद कोमा में रहा था शम्मी
वर्ष 1997 में रोहताश पंडित के इशारे पर राकेश बेदी और गिरीश ने शम्मी पर हमला कर दिया था। हमले के बाद शम्मी 5-6 दिन कोमा में रहा। रोहताश पंडित ने यूपी सरकार के मंत्री के भाई कुशलपाल त्यागी की हत्या कर दी थी। हमले के बाद शम्मी ने सीरिया पहलवान से संपर्क किया।
सीरिया उस समय जेल में बंद था। उसके कहने पर सीरिया के साथियों ने शम्मी के साथ मिलकर रोहताश पंडित की हत्या कर दी, जिसमें वह गिरफ्तार भी हुआ। सीरिया के कहने पर शम्मी ने श्रीप्रकाश शुक्ला से मुलाकात की। इसके बाद उसने शुक्ला के रहने व हथियारों का इंतजाम करवाया।
वर्ष 2000 में शम्मी ने अपने साथी देवेंद्र राणा, सतबीर राणा, राकेश भंडारी और यशबीर फौजी के साथ मिलकर यूपी पुलिस की कस्टडी से बंटी गुर्जर को भगाने में मदद की। आरोपियों ने मुरादनगर में हमला कर यूपी पुलिस की दो रायफल, एक कारबाइन भी लूट ली। शम्मी इस केस में भी गिरफ्तार हो गया।
इस बीच 2006 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने यशबीर फौजी को मुठभेड़ में मार गिराया। इधर राकेश बेदी से हमले का बदला लेने के लिए शम्मी ने उसके घर पर हमला कर राकेश की मां और भाई की हत्या कर दी। बाद में वह पांच साल फरीदाबाद की जेल में बंद रहा।
कारोबारियों से रंगदारी वसूलने लगा
फरीदाबाद की जेल से बाहर आने के बाद शम्मी ने पूर्वी दिल्ली की विवादित जमीनों का सौदा शुरू कर दिया। इसके अलावा वह कारोबारियों से रंगदारी वसूलने लगा। 2010 में वह लक्की गुप्ता नामक शख्स के संपर्क में आया। दोनों की दोस्ती खूब परवान चढ़ी।
इधर पूर्वी दिल्ली में कई भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की मदद से उसका जमीनों पर कब्जे का धंधा फलने-फूलने लगा, लेकिन बाद में दोनों के बीच विवाद हो गया। शम्मी ने लक्की को डराने के लिए गोलियां भी चलवाईं। इधर फरवरी 2018 में उसने लक्की के घर में घुसकर उसके पिता को भी गोलियां मार दीं, तभी से वह फरार था। पुलिस को उसकी तलाश थी।