तिहाड़ जेल में बंद विचाराधीन कैदी भी अब फैक्टरी में काम कर कमाई कर सकेंगे। अभी तक कारागार के भीतर फैक्टरी में कार्य करने का मौका सजायाफ्ता कैदियों को ही मिलता था। विचाराधीन कैदियों के भीतर कौशल को निखारने के लिए जेल प्रशासन ने यह फैसला लिया है। इसके लिए जेल मैन्युअल में प्रावधान किया गया है।
एशिया की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में कैदियों का चरित्र सुधारने का काम भी किया जाता है। जेल के भीतर फैक्टरी में सजायाफ्ता कैदी बेकरी, हैंडलूम, टेक्सटाइल, फर्नीचर, पेटिंग और मोमबत्ती बनाते हैं। इससे वह हुनरमंद हो रहे हैं और हजारों रुपये की कमाई भी कर रहे हैं। जेल के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने की कड़ी में अब विचाराधीन कैदियों को भी मौका दिया गया है। हालांकि इन कैदियों को सजायाफ्ता कैदी की तरह दूसरे जेलों में कार्य करने के लिए जाने की अनुमति नहीं होगी।
तीन माह अकुशल मजदूर के तौर पर करेंगे काम
जेल के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ऐसे कैदियों को पहले तीन माह अकुशल मजदूर के तौर पर काम करना पड़ेगा। अगले तीन माह अर्ध कुशल जबकि काम सीखने पर कुशल मजदूर के रूप में काम लिया जाएगा। इस दौरान उन्हें तयशुदा मजदूरी दी जाएगी। तिहाड़ जेल में अकुशल कैदियों को प्रतिदिन 270 रुपये, अर्ध कुशल को 340 रुपये और कुशल मजदूर को 400 रुपये दिए जाते हैं।
बैंक खाते भी खोले जाएंगे तिहाड़ का सामान टीजेएस (तिहाड़ जेल स्पेशल) के नाम से जाना जाता है, जो बाहर बाजारों में बिकता है। अधिकारियों ने बताया कि इन कैदियों के बैंक खाते खोले जाएंगे। इसमें पैसे जमा किए जाएंगे। जेल में इसका कुछ हिस्सा खर्च के लिए कूपन के रूप में दिया जाएगा।
- पहले विचाराधीन कैदियों को जेल प्रशासन की अनुमति से उनके कौशल के हिसाब से नाई, दर्जी और पढ़ाने का काम दिया जाता था
- ऐसे विचाराधीन कैदियों को काम का मौका दिया गया है, जो संगीन या ऐसे मामलों में बंद हैं, जिनके जल्द रिहा होने की संभावना नहीं है
तिहाड़ की फैक्टरी में काम करने वाले सजायाफ्ता कैदी
- कारपेंटर --------------- 150 कैदी
- तेल ------------------- 20 कैदी
- पेपर यूनिट ------------ 150 कैदी
- टेलरिंग ---------------- 30 कैदी
- बेकरी -------------------80 कैदी
- जूट बैग -----------------250 कैदी
- पेंटिंग -------------------160 कैदी