अब 2027 तक पूरा होगा भैरों मार्ग अंडरपास का निर्माण कार्य
बदले स्वरूप के कारण नहीं गुजर सकेंगे बस, ट्रक जैसे भारी व ऊंचे वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी की सबसे महत्वपूर्ण ट्रैफिक सुधार परियोजनाओं में शामिल भैरों मार्ग अंडरपास केवल देरी का नहीं, बल्कि बदली जरूरतों से सीमित उपयोगिता का भी प्रतीक बन गया है। जिस अंडरपास को ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए तैयार किया जा रहा है, अपने बदले स्वरूप के कारण निर्माण पूरा होने के बाद उससे बस, ट्रक जैसे भारी व ऊंचे वाहन नहीं गुजर सकेंगे।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों के अनुसार, अंडरपास का काम फरवरी तक पूरा होने की संभावना है। परियोजना का सबसे जटिल हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे बनने वाला सेक्शन है। इसके ऊपर से पूर्वी भारत की ओर जाने वाली महत्वपूर्ण रेल लाइनें गुजरती हैं। यही वजह है कि निर्माण कार्य लंबे समय से प्रभावित रहा। जुलाई में कुछ दिनों के लिए रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन रोका जाएगा और अंडरपास के मुख्य ढांचे का निर्माण किया जाएगा।
यमुना की बाढ़ से लगा से बढ़ा झटका
परियोजना को सबसे बड़ा झटका जुलाई, 2023 में यमुना में आई बाढ़ से लगा था। उस दौरान बाढ़ का पानी निर्माणाधीन साइट में भर गया था, जिससे अंडरपास का बड़ा हिस्सा जमीन में धंस गया था। इससे न केवल निर्माण कार्य कई महीनों तक ठप रहा, बल्कि डिजाइन और सुरक्षा मानकों की समीक्षा भी दोबारा करनी पड़ी।
पांच साल आगे खिसक चुकी है परियोजना
नई डिजाइन के अनुसार, भैरों मार्ग से रिंग रोड होते हुए आश्रम की ओर जाने वाले हिस्से से अब केवल कार और छोटे वाहन ही गुजर पाएंगे। बसों, ट्रकों और अन्य भारी वाहनों का प्रवेश संभव नहीं होगा। भैरों मार्ग और रिंग रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही भी ट्रैफिक जाम की बड़ी वजह रहती है। ऐसे में यदि अंडरपास केवल छोटे वाहनों के लिए सीमित रह जाता है तो ट्रैफिक दबाव पूरी तरह कम नहीं हो पाएगा।
यह परियोजना जून, 2022 में शुरू होनी थी। उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति मैदान टनल का उद्घाटन किया था। योजना थी कि टनल और अंडरपास मिलकर इंडिया गेट, प्रगति मैदान, आईटीओ और रिंग रोड के बीच यातायात का नया कॉरिडोर तैयार करेंगे, लेकिन रेलवे लाइन से जुड़ी तकनीकी अनुमति और निर्माण प्रक्रिया ने शुरुआत से ही काम को धीमा रखा।