गर्मियों में इस समस्या से निपटने के लिए विद्युत निगम ही योजना बना रहा है। जहां पर जलस्तर की वजह से अर्थिंग की समस्या खड़ी हुई है, वहां, विद्युत निगम अर्थिंग के स्थान पर अस्थायी गड्डे खोदकर पानी डाला जाएगा। जिससे जमीन में नमी बनी रहे और लोगों को बिजली के उतार-चढ़ाव की समस्या का सामना न करना पडे़।
नोएडा में 125 फीट तक नहीं पहुंचा भू-जल स्तर
- 2018 में नोएडा में भू-जल की स्थिति कई स्थानों पर 125 फीट नीचे तक पहुंच गई है। जबकि 2016 में 100 फीट तक था।
- दनकौर ब्लाक में भी भू-जलस्तर अब 40 फीट तक पहुंच गया है। जबकि कुछ साल पहले तक वहां पर 20 फीट पर पानी आ जाता था।
- जेवर ब्लाक में भू-जलस्तर 54 फीट तक पहुंच गया है। दो साल पहले तक इसकी 35 फीट तक पानी निकल जाता था।
कहां कितना औसत भू-जलस्तर
फेज-एक 90 से 100 फुट नीचे
फेज-दो 80 से 90 फुट नीचे
एक्सप्रेस-वे 60 से 70 फुट
फेज-तीन 90 से 100 फुट
हर साल डेढ़ से दो मीटर तक जल स्तर गिरता जा रहा है। गौतमबुद्धनगर में एक दशक पहले तक 20 फीट पर पानी निकल आता था। मगर अब यह लगातार नीचे जा रहा है और 75 फीट से अधिक पहुंच गया है। यदि अभी भी लोग नहीं चेते तो पानी के लिए तरसना पडे़गा।- रामवीर तंवर पर्यावरणविद व आरटीआई कार्यकर्ता
पानी का स्तर गिरने से नोएडा के कई सेक्टरों में ट्रांसफार्मरों को अर्थिंग कम मिल रही है। ट्रांसफार्मरों पर इसका प्रभाव कम करने के लिए फिलहाल टैंकर से अर्थिंग में पानी डालकर नमी बनाई जा रही है।- एसके वर्मा, मुख्य अभियंता, यूपीपीसीएल